क्या आप जानते हैं? कभी भारत के हर बड़े शहर की घड़ी अलग समय बताती थी, फिर ऐसे बना 'एक देश-एक समय' का नियम
आज पूरा भारत Indian Standard Time (IST) के हिसाब से चलता है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और दिल्ली की घड़ियां अलग-अलग समय दिखाती थीं. आखिर ऐसा क्यों था और अंग्रेजों ने इसे बदलने का फैसला क्यों किया?
आज अगर आप दिल्ली से मुंबई या कोलकाता की यात्रा करें तो घड़ी बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. पूरे देश में एक ही आधिकारिक समय लागू है, जिसे Indian Standard Time (IST) कहा जाता है. लेकिन 100 से अधिक वर्ष पहले भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग थी.
उस दौर में हर बड़े शहर का अपना स्थानीय समय (Local Mean Time) होता था. इसका मतलब यह था कि जिस शहर में सूरज सबसे ऊपर होता, वहीं के हिसाब से घड़ियां सेट की जाती थीं. इसलिए अलग-अलग शहरों के समय में कई मिनटों का अंतर होना बिल्कुल सामान्य बात थी.
उदाहरण के लिए, मुंबई (Bombay Time), कोलकाता (Calcutta Time) और मद्रास (Madras Time) अपने-अपने अलग समय का पालन करते थे. उस समय यह व्यवस्था लोगों के लिए बड़ी समस्या नहीं थी, क्योंकि लंबी दूरी की यात्रा और संचार आज जितने तेज नहीं थे.
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मुश्किल तब शुरू हुई, जब भारत में दौड़ने लगी ट्रेनें
19वीं सदी के दूसरे हिस्से में भारत में रेलवे का तेजी से विस्तार हुआ. अब एक शहर से दूसरे शहर तक ट्रेनें नियमित रूप से चलने लगीं. इसी के साथ टेलीग्राफ सेवा ने भी पूरे देश को जोड़ना शुरू कर दिया. यहीं से अलग-अलग समय की सबसे बड़ी समस्या सामने आई.
मान लीजिए, एक ट्रेन मुंबई से चली और उसे इलाहाबाद या कोलकाता पहुंचना था. अगर हर स्टेशन अपनी स्थानीय घड़ी के हिसाब से समय तय करे, तो ट्रेन का सही टाइम-टेबल बनाना लगभग असंभव हो जाता. इससे यात्रियों में भ्रम पैदा होता और रेलवे संचालन भी प्रभावित होता.
रेलवे अधिकारियों को जल्दी ही समझ में आ गया कि पूरे देश में एक समान समय व्यवस्था के बिना आधुनिक परिवहन को व्यवस्थित तरीके से चलाना मुश्किल होगा.
अंग्रेजों ने क्यों लागू किया एक समान समय?
ब्रिटिश सरकार ने रेलवे, डाक और टेलीग्राफ जैसी सेवाओं को सुचारु बनाने के लिए पूरे भारत में एक समान समय लागू करने की दिशा में काम शुरू किया.
1905 में भारत के लिए एक मानक समय (Standard Time) तय किया गया और 1 जनवरी 1906 से इसे आधिकारिक रूप से लागू किया गया. इसके लिए 82.5 डिग्री पूर्व देशांतर को आधार बनाया गया, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के पास से गुजरता है. यही समय आगे चलकर Indian Standard Time (IST) कहलाया.
फिर भी कुछ शहरों ने तुरंत नहीं बदली अपनी घड़ी
दिलचस्प बात यह है कि एक समान समय लागू होने के बाद भी कुछ शहरों ने अपने पुराने स्थानीय समय का इस्तेमाल कई वर्षों तक जारी रखा. मुंबई में Bombay Time लंबे समय तक चलता रहा और वहां इसे लेकर बहस भी हुई. इसी तरह कोलकाता में भी Calcutta Time कुछ समय तक प्रचलन में रहा. धीरे-धीरे रेलवे, सरकारी कार्यालयों और व्यापारिक जरूरतों के कारण पूरे देश ने IST को अपना लिया.
आखिर 82.5 डिग्री पूर्व देशांतर ही क्यों चुना गया?
भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 30 डिग्री देशांतर में फैला है. यदि हर शहर अपने स्थानीय समय पर चलता, तो देश के एक छोर से दूसरे छोर तक समय में लगभग दो घंटे का अंतर हो सकता था.
इस समस्या से बचने के लिए देश के लगभग मध्य भाग से गुजरने वाली 82.5° पूर्व देशांतर रेखा को चुना गया. इसी के आधार पर भारतीय मानक समय तय किया गया, जो ग्रीनविच मीन टाइम (GMT/UTC) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है.
क्या आज भी एक ही टाइम ज़ोन सही है?
आज भी भारत में केवल एक आधिकारिक टाइम ज़ोन है. हालांकि समय-समय पर यह बहस होती रही है कि पूर्वोत्तर राज्यों में सूर्योदय बहुत जल्दी हो जाता है, इसलिए वहां अलग टाइम ज़ोन होना चाहिए.
कुछ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने दो टाइम ज़ोन का सुझाव दिया है, जबकि दूसरी ओर सरकार और रेलवे का मानना है कि एक ही समय व्यवस्था प्रशासन, परिवहन और राष्ट्रीय समन्वय के लिए अधिक सुविधाजनक है. इसी कारण अभी तक पूरे भारत में IST ही लागू है.