मकर संक्रांति के दिन जहां देशभर में पतंगबाजी का उत्साह दिखा, वहीं नायलॉन से बनी पतंग की डोर, जिसे आमतौर पर ‘चाइनीज मांझा’ कहा जाता है, कई परिवारों के लिए मौत का कारण बन गया. अलग-अलग राज्यों में एक ही दिन में कम से कम चार लोगों की जान चली गई, जिससे यह साफ हो गया कि यह डोर कितनी खतरनाक साबित हो रही है.
चाइनीज मांझा नायलॉन से बनी बेहद पतली और तेज डोर होती है. इसे पहले चीन से मंगाया जाता था, इसी कारण इसे यह नाम मिला. यह मांझा आम सूती डोर की तुलना में ज्यादा मजबूत और धारदार होता है, जिससे यह दूसरी पतंगों की डोर आसानी से काट देता है. लेकिन यही धार इंसानी त्वचा और मांस को भी काट देती है, जिससे गंभीर चोट या मौत तक हो जाती है.
मध्य प्रदेश के इंदौर में 45 वर्षीय रघुबीर धाकड़ बाइक से जा रहे थे, तभी नायलॉन मांझे से उनकी गर्दन कट गई और ज्यादा खून बहने से उनकी मौत हो गई. उत्तर प्रदेश के जौनपुर में भी दो लोगों की जान चली गई. पहले एक शिक्षक की गर्दन कटने से मौत हुई और कुछ ही देर बाद बाइक चला रहे एक युवक की भी इसी तरह जान चली गई. कर्नाटक के बीदर जिले में 48 वर्षीय संजू कुमार होसामणि की गर्दन में मांझा फंस गया, जिससे उनकी मौके पर ही हालत बिगड़ गई और एंबुलेंस आने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया.
इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने चाइनीज मांझा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि अगर कोई नाबालिग इस प्रतिबंधित डोर से पतंग उड़ाता पाया गया, तो उसके माता-पिता या अभिभावक जिम्मेदार माने जाएंगे.
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि प्रतिबंध के बावजूद मांझा बेचने या इस्तेमाल करने वालों पर लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया जा सकता है. इसके तहत सख्त सजा का प्रावधान है.
पिछले एक साल में पुलिस ने लाखों गट्टे चाइनीज मांझा जब्त किया है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. इसके बावजूद यह डोर बाजारों में चोरी-छिपे बिक रही है. ऐसे में जरूरत है कि लोग खुद भी सतर्क रहें और सुरक्षित पतंगबाजी को अपनाएं, ताकि त्योहार की खुशी किसी की जिंदगी न छीन ले.