Jammu Kashmir Assembly Elections: प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा समर्थित चार लोगों ने आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए निर्दलीय रूप से पर्चा भरा है. अब इस संगठन पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने करारा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि अब तक यह संगठन कहता रहा है कि हराम है लेकिन अब इलेक्शन हलाल हो गया.
अभी तक हराम अब हलाल, देर आए दुरूस्त आए
उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'अभी तक तो कहा जा रहा था कि चुनाव हराम है. चलिये देर आये दुरूस्त आये. अब इलेक्शन जो है वो हलाल है और इसमें हर किसी को अब शिरकत करने की बात की जा रही है. हमें तो पहले दिन से कहते आए जेनब, जो भी होगा झमूरी तारीकों से. अब 30-35 साल जमात-ए-इस्लामी की जो सियासी सोच जो रही है, हमारे अंदर और आज की सोच में बदलाव आया है जो बुरी बात नहीं है. हम तो चाहते थे उनके ऊपर जो बैन लगा वो बैन हटे और वो अपनी पार्टी और सिंबल पर आएं, लेकिन बदकिस्मती से दिल्ली में वो फैसला हुआ नहीं. चलिये सिंबल पे ना सही, आज़ाद उम्मीदवार के तौर पे ही मैदान में उतरे.'
Earlier Elections Were Haram, Now They Are Halal as Per Jaamat-e-Islami; We Were Expecting Ban to Be Removed So They Can Participate on Their Symbol, Says Omar Abdullah pic.twitter.com/TP7QtwwZ8p
— Rising Kashmir (@RisingKashmir) August 27, 2024
जमात-ए-इस्लामी समर्थित चार उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन
बता दें कि मंगलवार को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी समर्थित चार उम्मीदवारों ने जम्मू-कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए निर्दलीय रूप से नामांकन दाखिल किया था. नामांकन दाखिल करने वालों में जमात-ए-इस्लामी का पूर्व सदस्य तलत मजीद भी शामिल है जिसने पुलवामा विधानसभा से पर्चा भरा है.
चुनावों का बहिष्कार करता रहा है संगठन
बता दें कि जमात-ए-इस्लामी 1987 से चुनावों से दूर रहा है और वह अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़ा हुआ है, जिसने 1993 से 2003 तक चुनाव के बहिष्कार को बढ़ावा दिया.
जमात-ए-इस्लामी पर क्यों है बैन
दरअसल, इस संगठन की गतिविधियां देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ पाई गई हैं. इस संगठन को पहली बार 28 फरवरी 2019 को गैरकानूनी संघ घोषित किया गया था.