menu-icon
India Daily

नहीं होगी LPG की कमी! भारत ने सुरक्षित किया 8 लाख टन गैस कार्गो, 15 देशों से आएगा ईंधन

होर्मुज तनाव के बीच भारत सरकार ने एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाया है और आयात के लिए अमेरिका तथा रूस जैसे नए देशों से हाथ मिलाया है. इससे देश में गैस सुरक्षा और मजबूत हुई है.

KanhaiyaaZee
नहीं होगी LPG की कमी! भारत ने सुरक्षित किया 8 लाख टन गैस कार्गो, 15 देशों से आएगा ईंधन
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका-ईरान के बीच ठनी रार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है. हालांकि अभी सीजफायर की स्थिति है, लेकिन तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई पर खतरा टला नहीं है. भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन केंद्र सरकार की सक्रियता ने एलपीजी संकट की आहट को अवसर में बदल दिया है. विविधीकरण और घरेलू उत्पादन पर जोर देकर भारत अब गैस सुरक्षा की दिशा में आत्मनिर्भर हो रहा है.

गैस सप्लाई की बाधाओं को देखते हुए भारतीय तेल कंपनियों ने अब स्पॉट मार्केट का रुख किया है. टीओआई की रिपोर्ट बताती है कि जून और जुलाई तक एलपीजी कार्गो भारत पहुंचने की उम्मीद है. इसके लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ विशेष टाइअप किया गया है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि घरों और कमर्शियल संस्थानों में सिलेंडर की कोई किल्लत न हो. सरकार अब केवल लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर नहीं है. बल्कि बाजार की तत्काल उपलब्धता का फायदा उठा रही है.

घरेलू उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल 

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार. युद्ध से पहले भारत अपनी 60 फीसदी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था. लेकिन अब सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं. इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और रोजाना होने वाला घरेलू उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़कर 46,000 टन तक पहुंच गया है. भारत की कुल दैनिक जरूरत लगभग 80,000 टन है. जिसमें अब स्थानीय हिस्सेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत और भरोसेमंद हो गई है.

खाड़ी देशों से इतर अब 'प्लान-बी' पर जोर 

पहले भारत की 90 फीसदी एलपीजी आपूर्ति केवल खाड़ी देशों जैसे यूएई, कतर और सऊदी अरब से होती थी. लेकिन युद्ध की अनिश्चितता ने सरकार को 'प्लान-बी' लागू करने पर मजबूर किया. अब भारत ने अपनी निर्भरता को बांटते हुए अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से गैस खरीदना शुरू कर दिया है. आयात करने वाले देशों की संख्या 10 से बढ़कर अब 15 हो गई है, जिससे किसी एक क्षेत्र में तनाव होने पर भी भारत ऊर्जा की दृष्टि से सुरक्षित रहेगा.

आयात के सुरक्षित रास्ते और भविष्य की तैयारी 

सरकार ने हाल ही में पुष्टि की है कि करीब 8 लाख टन एलपीजी का विशाल कार्गो पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है. यह स्टॉक वर्तमान में भारत के रास्ते में है, जो भविष्य की किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने में मददगार होगा. मोदी सरकार की रणनीति अब केवल संकट टालने की नहीं, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में नए विकल्पों को खोजने की है. रणनीतिक विविधीकरण ने वैश्विक बाजार में भारत की सौदेबाजी की शक्ति और विश्वसनीयता को भी काफी हद तक बढ़ा दिया है.

आम आदमी को राहत और सप्लाई की गारंटी 

होर्मुज तनाव के बावजूद भारत में एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है. इसका श्रेय सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) की प्रो-एक्टिव प्लानिंग को जाता है. मंत्रालय का कहना है कि उनकी प्राथमिकता घरेलू सप्लाई को सुचारू रखना है और इसके लिए दुनिया के किसी भी कोने से कार्गो मंगाया जाएगा. यह नई नीति भारत को भविष्य के ऊर्जा झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है, जिससे देश के आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है.