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बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष बनें नितिन नबीन! संगठन में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत

भारतीय जनता पार्टी की ओर से नितिन नबीन को अध्यक्ष चुना गया है. इसी के साथ नबीन सबसे युवा नेतृत्व के रूप में काम करने के लिए तैयार हैं.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने अपने अध्यक्ष का चुनाव कर लिया है. नितिन नबीन का इस शीर्ष पद पर चयन लगभग तय है क्योंकि उनके सामने कोई भी मुकाबले के लिए नजर नहीं आ रहा है.

पार्टी के भीतर इसे नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो युवा नेतृत्व को आगे लाने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. 45 वर्षीय नितिन नबीन पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे.

नितिन नबीन की नामांकन प्रक्रिया

भाजपा मुख्यालय में सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई. चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण ने बताया कि नितिन नबीन के समर्थन में कुल 37 सेट नामांकन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से तथा एक संसदीय दल की ओर से थे. 

नितिन नबीन के नामांकन को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, किरेन रिजिजू, हरदीप पुरी और निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत अनेक वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिला. इसके अलावा दिल्ली, गुजरात, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी इस अवसर पर मौजूद रहे. उनसे पहले वर्ष 2014 में अमित शाह 49 वर्ष की उम्र में इस पद पर पहुंचे थे.

विधानसभा चुनावों की रणनीति करेंगे तय

नितिन नबीन का चयन इस बात का संकेत है कि पार्टी अब संगठन में युवा चेहरों को अधिक जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की जिम्मेदारी काफी अहम होगी. उनके नेतृत्व में भाजपा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति तय करेगी. इसके साथ ही वे लंबे समय से लंबित संगठनात्मक बदलावों की भी निगरानी करेंगे, जिन्हें अगले एक वर्ष के भीतर पूरा किए जाने की संभावना है.

रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण ने बताया कि पार्टी के संगठनात्मक चुनाव, जिन्हें ‘संगठन पर्व’ कहा जाता है, 36 में से 30 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव पूरे होने के बाद शुरू किए गए. राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 50 प्रतिशत राज्यों में चुनाव संपन्न होने के बाद आरंभ की जाती है. भाजपा नेताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था का उदाहरण है.