'4 मई से पहले हुआ था पेपर लीक..' CJI ने किया सवाल, पढ़ें सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने NEET UG केस 2024 की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि ग्रेस मार्क क्यों दिए गए. जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मेरे ख्याल से ये सही फैसला नहीं था. टाइमिंग की दिक्कत थी, इसलिए ग्रेस मार्क दिए गए. बाद में ग्रेस मार्क हटा लिए गए और दोबारा टेस्ट आयोजित कराया गया.
सुप्रीम कोर्ट में NEET UG 2024 परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक केस को लेकर सुनवाई चल रही है. परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली की खबरें सामने आई थीं. पेपर लीक केस के तार बिहार से लेकर राजस्थान तक जुड़े थे. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस DY चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पादरीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है. केस की सुनवाई सुबह 10 बजे से शुरू हुई.
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को हुई सुनवाई में कहा था कि NTA राज्यवार परीक्षा के नतीजे जारी करे, जिससे परीक्षा में दिख रहे किसी असामान्य नतीजे को समझा जा सके. जहां पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, वहां अगर ऐसे असमान नंबर नजर आते हैं तो उन्हें पहचाना जा सके.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी इशारा किया है कि नीट केस का निपटारा, सोमवार को ही हो सकता है. आइए जानते हैं इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ है, कोर्ट में कैसी बहस चली है.
- सुनवाई के दौरान CJI ने सवाल किया कि कैसे केनरा बैंक को पता था कि पेपर देने के लिए सही व्यक्ति कौन है. किसने अधिकारिता का प्रमाण पत्र दिया. क्या अथरॉइजेशन दोनों बैंक को दिया गया था. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह दोनों बैंकों के लिए था. सिटी कॉर्डिनेटर से कहा गया था कि किस बैंक के पास जाना है.
- सीजेआई ने सवाल किया कि क्या झज्जर में सिटी कॉर्डिनेटर केनरा बैंक गए थे और सभी केंद्रों पर पेपर बांटे या सब बराबर था. एडवोकेट हुड्डा ने कहा कि उन्होंने सभी बैंक से कल्केट किया. जवाब में नेशनल टेस्टिंग की ओर से कहा गया कि उन्होंने केनरा बैंक के पेपर को तीन केंद्रों पर बंटवाया. दो जगहों पर इसे वापस ले लिया गया, जब उन्हें गलती का एहसास हुआ. दूसरे केंद्रों पर यह चलता रहा.
- चीफ जस्टिस ने SG और NTA से सवाल किया कि कितने केंद्रों पर केनरा बैंक के पेपर बांचे गए. उन केंद्रों में से कितने सेंटर्स के पास सही क्वेश्चन बुकलेट (एसबीआई पेपर) को बदला गया. कितने केंद्रों पर केनरा बैंक के पेपर्स का मूल्यांकन हुआ.
- हुड्डा ने कहा कि सब कुच पर्दे के पीछे हुआ है, कुछ भी बताया नहीं गया है. 1563 केंद्रों में से केवल 863 अभ्यर्थी दोबारा परीक्षा में शामिल हुए. कोर्ट ने सवाल किया कि 1563 कितने केंद्रों से आए हैं. हुड्डा ने कहा कि यह बताया नहीं गया है. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस पर बहस नहीं हुआ है.
- चीफ जस्टिस ने कहा कि मान रहे हैं कि गलती हुई है, हमें आकंड़े दिखाए, जो हर जगह पहुंचे.
- हुड्डा ने कहा, 'जो आंकड़े 4 जून और 20 जुलाई को जारी हुए थे, उसमें बिहार में 13,000 का अंतर था. कई नंबर घट गए थे. सीजेआई ने सवाल किया कि कोटा और सीकर दोनों जगह समान छात्र थे. 50 केंद्रों में से 38 पर 650 से ज्यादा नंबर हासिल करने वाले छात्र थे. इनमें ज्यादातर सीकर से थे. 6 महेंद्र गढ़ से थे.
- हुड्डा ने कहा कि आंकड़ों से पता चला है कि कुछ केंद्र ऐसे हैं, जहां छात्रों का प्रदर्शन बेहतर थे. अगर टॉप सेंटर्स की गणना करें तो 38 केंद्रों पर 650 नंबर से ज्यादा मार्क छात्रों ने हासिल किया है.
- सेजीआई ने सवाल किया कि एग्जाम होने के बाद सीलिंग कितने देर बाद शुरू हुई. हुड्डा ने कहा कि मुझे पूरे एसओपी में यह नहीं मिला. ओएमआर सीट में को सील करने का समय क्या था. यह बताया ही नहीं गया है. एनटीए के पास कोई प्रक्रिया नहीं है जो ये बता से.
- हुड्डा ने कहा कि हरदयाल स्कूल में 719 मार्क हासिल करने वाले छात्र के आंकड़े 68 थे. जब दोबारा परीक्षा हुई तो उसी छात्र की रैंकिंग 58,000 है. अब उन्हें ये नहीं पता है कि एसबीआई का पेपर दिया गया है, या केनरा बैंक का पेपर दिया गया है. 4 जून तक उन्होंने नहीं बताया कि ग्रेस मार्क दिया गया है.
- हुड्डा ने कहा कि जहां तक झज्झर का सवाल है, उन्होंने कहा कि केनता बैंक पेपर दिया गया था और उसका मूल्यांकन हुआ. वे कह रहे हैं कि न तो ग्रेस मार्क दिया गया, न ही अतिरिक्त समय दिया गया. यह फैसला किसने लिया.
- सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मेरे दोस्त, यह कह रहे हैं कि पूरे देश में हुई परीक्षा में धांधली हुई है. उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिया, जो उनकी मदद नहीं करेगा. हुड्डा ने जवाब में कहा कि यह तंत्र की विफलता है.