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'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद...' इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे पूर्व शिक्षा मंत्री, NDA सांसदों ने पाग पहनाकर किया स्वागत

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर NDA सांसदों ने मकरद्वार पर उनका स्वागत किया. बीजेपी ने संदेश दिया कि उनका इस्तीफा स्वैच्छिक फैसला था और संगठन उनके साथ मजबूती से खड़ा है.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद...' इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे पूर्व शिक्षा मंत्री, NDA सांसदों ने पाग पहनाकर किया स्वागत
Courtesy: X (@ANI)

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे. उनके पहुंचते ही NDA सांसदों ने मकरद्वार पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और सम्मान के तौर पर पाग पहनाई. इसके बाद सांसद उन्हें साथ लेकर सदन के अंदर गए. इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की ओर से एक अहम राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें प्रधान के फैसले के साथ पार्टी के समर्थन को दिखाने की कोशिश की गई.

मकरद्वार पर NDA सांसदों ने किया स्वागत

धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने उनका स्वागत किया. इस दौरान उन्हें पारंपरिक तरीके से पाग पहनाई गई और सम्मान के साथ संसद भवन के अंदर ले जाया गया. पार्टी नेताओं ने इस कदम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि प्रधान का इस्तीफा किसी दबाव का परिणाम नहीं था. बीजेपी के अनुसार, उन्होंने छात्रों और देश के हित को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया.

इस्तीफे को लेकर दिया गया राजनीतिक संदेश

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस स्वागत के जरिए यह स्पष्ट करना चाहती है कि धर्मेंद्र प्रधान के फैसले को संगठन का पूरा समर्थन हासिल है. पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री की ओर से उनसे इस्तीफा नहीं मांगा गया था. वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह का सार्वजनिक सम्मान उनकी छवि को बनाए रखने और विवादों को शांत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

बीजेपी नेताओं ने की थी मुलाकात

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी. इनमें गृह मंत्री अमित शाह, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और निर्मला सीतारमण जैसे नेता शामिल थे. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी उनके आवास पहुंचकर बातचीत की थी. नेताओं ने उनके इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, लेकिन इसे स्वैच्छिक फैसला बताया.

नीट विवाद की जिम्मेदारी का किया था जिक्र

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के बाद युवाओं के नाम लिखे पत्र में नीट पेपर लीक मामले का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि उन्होंने इस मामले की जिम्मेदारी पहले दिन से स्वीकार की थी और छात्रों के हित में जरूरी कदम उठाए गए. उन्होंने बताया था कि नीट परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई और परिणाम भी जल्द जारी किए गए.

विपक्ष भी रहा सक्रिय

संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत के दौरान विपक्षी सांसद भी मकरद्वार के आसपास नजर आए. विपक्ष लगातार नीट विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है. ऐसे में संसद परिसर का यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में रहा. बीजेपी ने अपने स्तर पर प्रधान के साथ एकजुटता दिखाने का प्रयास किया.