स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में तिरंगे के साथ आजादी का उत्सव मनाया गया, लेकिन महाराष्ट्र के नाशिक में इसका एक बेहद मासूम रूप देखने को मिला. जिला अस्पताल की नवजात शिशु देखभाल इकाई में मौजूद नर्सें ड्यूटी के कारण बाहर आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकती थीं. उन्होंने इसी जगह को जश्न का हिस्सा बना लिया. तीन नवजात बच्चों को तिरंगे के तीन रंगों में सजाकर उन्होंने ऐसा दृश्य बनाया, जिसने वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी.
न्यूबोर्न बेबी केयर यूनिट में नर्सों ने तीन बच्चों को अलग-अलग रंगों के कपड़े पहनाए. एक बेबी को केसरिया, दूसरे को सफेद और तीसरे को हरे रंग में लपेटा गया. इसके बाद तीनों को साथ रखा गया, जिससे दूर से तिरंगे का स्वरूप नजर आने लगा. किसी बड़े आयोजन के बिना तैयार हुआ यह छोटा सा दृश्य स्वतंत्रता दिवस की भावना को बेहद सरल और भावुक तरीके से सामने लाया.
न्यूबोर्न बेबी केयर यूनिट में संक्रमण से बचाव और बच्चों की लगातार निगरानी सबसे जरूरी होती है. ऐसे में वहां तैनात नर्सें अपनी ड्यूटी छोड़कर किसी बाहरी कार्यक्रम में नहीं जा सकती थीं. उन्होंने इसी वजह से अस्पताल के भीतर ही स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया. बच्चों को तिरंगे के रंगों में सजाना उनके लिए केवल सजावट नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देश के राष्ट्रीय पर्व से जुड़ने का तरीका था.
नवजात बच्चों की माताओं के लिए अस्पताल में हर छोटी खुशी बड़ी मायने रखती है. बच्चे को स्वस्थ देखने की चिंता के बीच जब उन्होंने अपने शिशुओं को तिरंगे के रंगों में सजा देखा, तो उनके चेहरे खिल उठे. नर्सों की इस छोटी पहल ने माताओं के लिए स्वतंत्रता दिवस को और यादगार बना दिया. अस्पताल के माहौल में कुछ देर के लिए चिंता की जगह खुशी और उत्साह नजर आया.
इन बच्चों को अभी स्वतंत्रता दिवस, तिरंगा या देशभक्ति जैसे शब्दों का अर्थ पता नहीं, फिर भी वे इस जश्न का हिस्सा बन गए. नाशिक की नवजात इकाई में बना यह दृश्य बताता है कि देशभक्ति के लिए किसी बड़े मंच की जरूरत नहीं होती. कहीं हाथ में झंडा होता है, कहीं घर पर तिरंगा लहराता है, तो कहीं तीन नन्हे बच्चे मिलकर राष्ट्रीय ध्वज की खूबसूरत तस्वीर बना देते हैं.