भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई दिशा मिलने के संकेत हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को आर्टेमिस मिशन से जुड़े मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, यह पहल आर्टेमिस समझौते के तहत दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत कर सकती है. भारत और अमेरिका खुले वैज्ञानिक आंकड़ों को साझा करने और नागरिक अंतरिक्ष गतिविधियों में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं.
नासा ने भारत को अपने चंद्रमा आधारित कार्यक्रम से जुड़ने का प्रस्ताव दिया है. इस कार्यक्रम का लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास गतिविधियों को आगे बढ़ाना और भविष्य के मानव मिशनों के लिए आधार तैयार करना है. अमेरिका इसे मंगल ग्रह पर मानव अभियान की तैयारी से भी जोड़ रहा है. भारत की भागीदारी से दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग का दायरा बढ़ सकता है.
भारत 21 जून 2023 को आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वां देश बना था. यह समझौता अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण और नागरिक उपयोग तथा भविष्य के अन्वेषण के लिए सहयोग के सिद्धांत तय करता है. भारत और अमेरिका अब खुले वैज्ञानिक आंकड़ों को साझा करने पर भी आगे बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्ष नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह की नौवीं बैठक 5 और 6 अगस्त को बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय में हुई. भारत ने इस बैठक की मेजबानी की. चर्चा के दौरान विज्ञान, मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक और भविष्य की साझेदारी से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई. इसी दौरान आर्टेमिस समझौते के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने और वैज्ञानिक आंकड़ों के आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई.
आर्टेमिस नासा का महत्वाकांक्षी चंद्र कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य मानव को फिर चंद्रमा तक पहुंचाना और वहां भविष्य की गतिविधियों के लिए आधार तैयार करना है. आर्टेमिस-1 नवंबर 2022 में मानवरहित परीक्षण के रूप में लॉन्च हुआ था. इसके बाद आर्टेमिस-2 ने अप्रैल 2026 में चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ चंद्रमा की परिक्रमा की. आगे के चरणों में चंद्र कक्षा में परीक्षण और दक्षिणी ध्रुव पर मानव लैंडिंग की योजना है.
नासा चंद्रमा पर विकसित किए जाने वाले आधार को भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी से जोड़ रहा है. इसका एक अहम उद्देश्य मंगल ग्रह पर मानव मिशन के लिए जरूरी तकनीक और अनुभव हासिल करना है. भारत के लिए इस सहयोग का महत्व वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के विस्तार में हो सकता है. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों पर बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है.