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मुझे बाहर निकालो... ट्रेन में RPF कांस्टेबल ने 4 लोगों को उतारा था मौत के घाट, अब परिवार से की ये अपील

Mumbai Jaipur Train Firing Case: मुंबई-जयपुर ट्रेन में एक ही समुदाय के चार लोगों की गोली मारकर हत्या के मामले में जेल में बंद आरपीएफ के पूर्व कांस्टेबल ने परिवार से अपील की है कि उसे बाहर निकलवाया जाए. पिछले एक साल से मुंबई सेंट्रल जेल में बंद चेतन सिंह के खिलाफ अभी मुकदमा शुरू नहीं हुआ है. उधर, उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब बताई जा रही है.

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Mumbai Jaipur Train Firing Case: बोरीवली के पास जयपुर-मुंबई ट्रेन में एक साल पहले चार लोगों की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी चेतन सिंह ने परिवार से अपील की है कि उसे बाहर निकलवाया जाए. घटना के बाद चेतन सिंह को आरपीएफ ने कांस्टेबल पद से हटा दिया था. चेतन सिंह पिछले एक साल से मुंबई के अकोला जेल में बंद है. उधर, पीड़ितों के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि शीघ्र सुनवाई के आश्वासन के बावजूद मामला धीमी गति से आगे बढ़ रहा है. अभी तक मुकदमा भी शुरू नहीं हुआ है. पीड़ितों के परिवार ने आरोपी चेतन सिंह के लिए अधिकतम और कड़ी सजा की मांग की.

पिछले साल 31 जुलाई को 34 साल के चेतन सिंह चौधरी ने अपने सीनियर असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर टीकाराम मीना और तीन यात्रियों (अब्दुल कादर मोहम्मद हुसैन भानपुरवाला, सैयद सैफुद्दीन और असगर अब्बास शेख) की मुंबई-जयपुर मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी थी. अक्टूबर 2023 में बोरीवली जीआरपी अधिकारियों ने चेतन सिंह के खिलाफ लगभग 39 चश्मदीद गवाहों के बयानों के साथ 1,097 पेज का चार्जशीट दायर किया था.

हालांकि, पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि आरोपी चेतन सिंह के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया अभी तक नहीं हुई है. मामले में मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है. सरकार ने घोषणा की थी कि मामले को फास्ट ट्रैक आधार पर चलाया जाएगा. हालांकि, अभी तक इस मामले में विशेष सरकारी वकील नियुक्त नहीं किया गया है, ऐसा एक अन्य सूत्र ने बताया. 

पीड़ितों के परिवार के सदस्यों ने क्या कहा?

हैदराबाद के रहने वाले सैफुद्दीन सईद (44) के भाई ने आरोप लगाया कि मामला कछुए की गति से आगे बढ़ रहा है और पुलिस पीड़ित के परिवार के सदस्यों को मामले की कोई जानकारी नहीं दे रही है. यूनुस सैयद ने कहा कि मेरा भाई अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था. परिवार में हमारे साथ उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं. बच्चे छोटे हैं और अभी भी अपने पिता को याद करते हैं. आरोपी आरपीएफ कांस्टेबल ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया है. उसे अधिकतम सजा मिलनी चाहिए.

हैदराबाद के मोबाइल तकनीशियन सैफुद्दीन सैयद घटना के दिन अपने किसी काम से मुंबई जा रहे थे. वहीं, असगर अब्बास अली शेख (48) के परिवार के सदस्यों ने कहा कि ये एक रक्षक से शिकारी बने व्यक्ति का मामला है और आरोपी को सख्त सजा मिलनी चाहिए. नागपुर के रहने वाले असगर अब्बास अली शेख के सौतेले भाई मोहम्मद जिकरउल्लाह सैयद (29) ने कहा कि आरोपी आरपीएफ कांस्टेबल को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. उसने चार परिवारों को बर्बाद कर दिया. उसका कर्तव्य यात्रियों की रक्षा करना था, लेकिन उसने खुद यात्रियों को मार डाला. उसे मौत की सजा मिलनी चाहिए. अगर ऐसे जघन्य अपराधों के दोषियों को सख्त सजा नहीं दी जाती है, तो हम अपराधियों को ऐसे और अपराध करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.

मृतक अब्दुल कादर मोहम्मद हुसैन भानपुरवाला के परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु भट्ट ने कहा कि मामला कछुए की गति से आगे बढ़ रहा है, क्योंकि आरोपी के खिलाफ अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं. पुलिस के अनुसार, चेतन सिंह ने कथित तौर पर ट्रेन में एक बुर्का पहने यात्री को बंदूक की नोक पर 'जय माता दी' कहने के लिए मजबूर किया और एक अन्य यात्री से कहा कि वह 2008 (पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए मुंबई 26/11 आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए) का बदला ले रहा है.

हत्या के बाद चेतन ने लाश के पास खड़े होकर दी थी हेट स्पीच!

चार लोगों की हत्या करने के बाद, आरोपी चेतन सिंह ने पीड़ितों में से एक के शव के पास खड़े होकर हेट स्पीच दी थी. उसके भाषण के वीडियो की फोरेंसिक जांच पहले ही हो चुकी थी, जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) को जोड़ा था.

घटना के बाद चेतन सिंह को आरपीएफ ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था. वहीं, चेतन सिंह के वकील अमित मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पहले भी अधिकारियों से अनुरोध किया था कि उन्हें वापस मुंबई या ठाणे की जेल में स्थानांतरित कर दिया जाए. हालांकि, जेल अधिकारियों ने अनुरोध को खारिज कर दिया और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें अकोला जेल में ही रखा. 

चेतन की मां बोली- बेटे ने बड़ा पाप किया, कीमत परिवार चुका रहा है

उत्तर प्रदेश के रहने वाले चेतन की मां 53 साल की राजेंद्री देवी ने कहा कि उनके बेटे ने बहुत बड़ा पाप किया है जिसकी कीमत अब उनका परिवार चुका रहा है. उन्होंने कहा कि चेतन ने चार लोगों को मार डाला, चार परिवारों को बर्बाद कर दिया. उसने अपने (दिवंगत) पिता का नाम और प्रतिष्ठा बर्बाद कर दी... अपने पापपूर्ण कृत्य के कारण उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. अब हम अपना पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उसे मुझे मार देना चाहिए था. मुझे नहीं पता कि उसके मन में इतने कट्टरपंथी विचार कैसे आ गए... उसके सीनियर अफसर भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने उसके व्यवहार में कोई बदलाव क्यों नहीं देखा और अगर ऐसा कुछ था, तो अधिकारियों ने उसे बंदूक क्यों दी?

चेतन की मां ने ये भी कहा कि जब मैं और मेरी बेटी जेल में उससे मिलीं तो वो जेल से बाहर निकलने में मदद के लिए उनसे भीख मांग रहा था. राजेंद्री देवी ने कहा कि मैंने उससे ज़्यादा बातचीत नहीं की और अपनी बेटी से उससे बात करने को कहा. चेतन ने बातचीत में कहा कि मुझे नहीं पता कि चार लोगों की हत्या कैसे कर दी और फिर वो गिड़गिड़ाया और रोते हुए कहा कि मुझे बाहर निकालो.