Mount Everest: हिमालय के हाईएस्ट पीक, माउंट एवरेस्ट पर इस हफ्ते बड़ा हादसा घटा, जब दो पर्वतारोहियों की जान चली गई. एक भारतीय और दूसरा फिलीपीनी पर्वतारोही अलग-अलग अभियानों में अपनी जान गंवा बैठे, जिससे इस साल की एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान पहली बार मौतों की खबर सामने आई.
नेपाल के पर्यटन विभाग और अभियान आयोजकों के मुताबिक, भारतीय पर्वतारोही सुभ्रत घोष (45) ने गुरुवार को एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने के बाद, उतरते समय अपनी जान गंवा दी. वह हिलैरी स्टेप के नीचे, जो एवरेस्ट के सबसे खतरनाक और संकरे हिस्सों में से एक है, चढ़ाई करने से इंकार कर रहे थे. इस स्थान को 'मौत का क्षेत्र' भी कहा जाता है, जहां ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम होती है कि शारीरिक गतिविधि करना भी मुश्किल हो जाता है.
हिमालयन यात्रा कंपनी 'स्नोवी होराइजन ट्रेक्स एंड एक्सपेडिशन' के अधिकारी बोधराज भंडारी ने बताया, 'वह उच्चतम ऊंचाई पर उतरने में आनाकानी कर रहे थे और फिर उनका निधन हो गया.' घोष के निधन के कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है और उनके शरीर को लाकर पोस्टमॉर्टम किया जाएगा.
दूसरी तरफ, फिलीपीनी पर्वतारोही फिलिप II सैंटियागो (45) ने बुधवार देर रात दक्षिण कॉल पर अपनी जान गंवा दी. वह चौथे कैंप तक पहुंचने के बाद अत्यधिक थकान महसूस कर रहे थे और आराम करते वक्त उनके निधन की पुष्टि की गई. नेपाल पर्यटन विभाग के अधिकारी हिमल गौतम ने कहा, 'वह अपने तंबू में आराम कर रहे थे, जब उनका निधन हुआ.'
इस बार, नेपाल ने एवरेस्ट के लिए 459 चढ़ाई परमिट जारी किए हैं और इस सीजन में सैकड़ों पर्वतारोही और उनके शेरपा गाइड पहले ही शिखर पर पहुंच चुके हैं. एवरेस्ट पर चढ़ाई का मौसम आमतौर पर मई के अंत तक चलता है, जब तक मानसून नहीं आ जाता.
नेपाल के लिए पर्वतारोहण एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है, लेकिन एवरेस्ट पर चढ़ाई हमेशा जोखिम से भरी होती है. हिमालयन डाटाबेस के अनुसार, पिछले सौ सालों में 345 से अधिक पर्वतारोही इस पर्वत पर अपनी जान गंवा चुके हैं. अधिकारियों ने पर्वतारोहियों से अपील की है कि वे ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन करें, क्योंकि इस सीजन के बाकी हफ्तों में कई अन्य लोग शिखर पर चढ़ने की कोशिश करेंगे.