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Air India crash: आग में दौड़कर बचाया, फिर बच्चे के इलाज के लिए दी अपनी चमड़ी, मां के इस बलिदान को भुलाया नहीं जा सकेगा

एयर इंडिया IC171 हादसे में आठ महीने के बच्चे ध्यांश कछाड़िया की जान उसकी मां मनीषा कछाड़िया की बहादुरी और ममता ने बचा ली. हादसे में बुरी तरह जल चुके बच्चे के इलाज के लिए मां ने अपने शरीर की त्वचा दान की और उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई.

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Kuldeep Sharma

12 जून की रात अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया IC171 विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. हादसे में 260 लोगों की जान चली गई, लेकिन इसी त्रासदी के बीच एक मां की ममता और हिम्मत की कहानी सामने आई, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया. आठ महीने के ध्यांश को आग से बचाने के लिए उसकी मां ने खुद को ढाल बना लिया और बाद में उसके इलाज के लिए अपनी त्वचा भी दान की

मनीषा कछाड़िया, जो बीजे मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंशियल क्वार्टर्स में अपने बेटे ध्यांश के साथ रह रही थीं, हादसे की रात अपने फ्लैट में थीं. उनके पति, डॉ. कपिल कछाड़िया, यूरोलॉजी में सुपर-स्पेशियलिटी कर रहे हैं. जब विमान उनके फ्लैट से टकराया, तो चारों ओर आग और धुआं फैल गया. मनीषा ने बिना सोचे-समझे अपने बेटे को उठाया और जलती हुई इमारत से बाहर निकलने की कोशिश की. धुएं और लपटों के बीच उन्होंने अपने शरीर से बेटे को ढक लिया, जिससे वह आंशिक रूप से बच पाया. मनीषा के चेहरे और हाथों में 25% और ध्यांश के शरीर के कई हिस्सों में 36% तक जलन हुई.

अस्पताल में मां ने फिर दिखाई बहादुरी

दोनों को अहमदाबाद के केडी अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने बताया कि ध्यांश की हालत नाजुक थी, उसे वेंटिलेटर, खून चढ़ाना और पीआईसीयू में चौबीसों घंटे निगरानी की जरूरत थी. उसका एक फेफड़ा भी काम नहीं कर रहा था, जिसके लिए एक विशेष ट्यूब लगानी पड़ी. जब डॉक्टरों ने बताया कि उसके जलन के इलाज के लिए त्वचा की आवश्यकता होगी, तो मनीषा ने तुरंत अपनी त्वचा दान करने की पेशकश की.

मां-बेटे की नई जिंदगी की शुरुआत

डॉ. रुतविज परिख के नेतृत्व में प्लास्टिक सर्जरी टीम ने त्वचा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अंजाम दिया. डॉक्टरों के अनुसार, मां और बेटे दोनों की त्वचा के उपयोग से संक्रमण और अस्वीकार की आशंका कम हो गई. इलाज में डॉ. अदित देसाई, डॉ. स्नेहल पटेल, डॉ. तुषार पटेल और डॉ. मानसी डंडनाइक की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पांच हफ्तों के गहन इलाज के बाद अब मां और बेटा दोनों घर लौट आए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि शरीर के घाव समय के साथ ठीक हो जाएंगे, लेकिन यह ममता और संघर्ष की कहानी लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी.