रूठा मॉनसून करेगा दमदार वापसी! 18 जुलाई के बाद झमाझम बारिश के संकेत

देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी के बीच मौसम वैज्ञानिकों ने 18 से 25 जुलाई के दौरान मॉनसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई है. प्रशांत महासागर में बन रहे मौसमी सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ राहत की उम्मीद बढ़ा रहे हैं.

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Kuldeep Sharma

भारत के अधिकांश राज्यों में इन दिनों मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिससे खेती, जलाशयों और पेयजल व्यवस्था पर असर दिखाई देने लगा है. हालांकि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में हालात बदल सकते हैं. पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहे मौसम तंत्र और उत्तर भारत में पहुंच रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण 18 से 25 जुलाई के बीच मॉनसून के दोबारा जोर पकड़ने की संभावना बन रही है. फिलहाल वैज्ञानिक लगातार मौसम के बदलते संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं.

प्रशांत महासागर से बढ़ी उम्मीद

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर में कई ट्रॉपिकल सिस्टम और निम्न दबाव वाले क्षेत्र विकसित हो रहे हैं. यदि इनमें से कुछ सिस्टम पश्चिम की ओर बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंचते हैं, तो वे मॉनसून की नमी वाली हवाओं को नई ताकत दे सकते हैं. कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मौसम मॉडल भी इसी दिशा में संकेत दे रहे हैं. हालांकि वैज्ञानिक अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं, क्योंकि इन प्रणालियों की दिशा और तीव्रता अगले कुछ दिनों में तय होगी. इसलिए हर नए मौसम अपडेट का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है.

उत्तर भारत को पश्चिमी विक्षोभ से राहत

दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम भारत के लिए भी राहत की संभावना बनी है. एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में अगले दो-तीन दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश ला सकता है. इससे तापमान में हल्की गिरावट आने के साथ स्थानीय स्तर पर सूखे की स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश खरीफ फसलों और जल स्रोतों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है.


18 से 25 जुलाई रहेगा अहम दौर

मौसम विभाग के अनुसार 18 से 25 जुलाई का समय मॉनसून के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि बंगाल की खाड़ी में मौसम तंत्र सक्रिय हुआ, तो मध्य भारत, उत्तर भारत और पश्चिमी राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाएगी. इससे धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों को राहत मिलने के साथ जलाशयों का स्तर भी सुधर सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम पूरी तरह इन प्रणालियों की गतिविधियों पर निर्भर करेगा. इसलिए किसानों और आम लोगों को आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है.