नई दिल्ली: बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात हुई. बैठक ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाया है और उसके साथ कारोबार करने वाले देशों को प्रतिबंधों की चेतावनी दी है. इसके बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया. दोनों नेताओं ने व्यापार बढ़ाने, पश्चिम एशिया की स्थिति और वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा पर बातचीत की.
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत ईरान के साथ अपनी पुरानी मित्रता को अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने और उसकी दिशा को व्यापक बनाने पर चर्चा हुई. भारत का जोर ऐसे समय में भी आर्थिक संबंध बनाए रखने पर है, जब वॉशिंगटन तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है. हाल में अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़ी भारत की कुछ कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं.
बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी प्रमुख मुद्दा रहा. मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए. भारत ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही. इस दौरान नागरिकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया. भारत ने साफ किया कि संघर्ष के बीच आम लोगों और जरूरी सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए.
पश्चिम एशिया का संकट व्यापारिक जहाजों और समुद्री यातायात के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है. मोदी ने नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री नाविकों को किसी भी परिस्थिति में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से प्रमुख समुद्री मार्गों पर सुरक्षा जोखिम पैदा हुए हैं और वैश्विक व्यापार पर भी इसका असर पड़ सकता है.
ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने भारत के समर्थन की सराहना करते हुए पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए भारत की भूमिका बढ़ाने की इच्छा जताई. उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न देशों के साथ संपर्क हैं और वह इन संबंधों का इस्तेमाल तनाव कम करने के लिए कर सकता है. पेजेशकियन ने युद्ध के बजाय बातचीत और समझौते की जरूरत बताई. उन्होंने भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने की इच्छा भी जताई.
मोदी ने ईरान के साथ बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जारी रखने की बात कही. उन्होंने पेजेशकियन को आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का निमंत्रण भी दिया. दोनों नेताओं की यह बातचीत ऐसे दौर में हुई है, जब ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. इसके बावजूद भारत ने अपने पुराने संबंधों को बनाए रखने और व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने का संकेत दिया. बैठक ने क्षेत्रीय शांति और आर्थिक संपर्क के मुद्दों पर दोनों देशों की बातचीत को नई दिशा दी.