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केंद्र सरकार की सर्वदलीय बैठक खत्म, पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा; TMC ने किया बहिष्कार

मिडिल ईस्ट जंग दुनियाभर के देशों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है. इस बीच भारत सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक जारी है. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने बैठक का बहिष्कार किया है.

Anuj

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट की जंग दुनियाभर के देशों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है. इस बीच भारत सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक जारी है. सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने बैठक का बहिष्कार किया है.

इस अहम बैठक में गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं. कांग्रेस का प्रतिनिधित्व तारिक अनवर और मुकुल वासनिक कर रहे हैं, जबकि वाम दल सीपीआईएम की ओर से जॉन ब्रिटास बैठक में मौजूद हैं. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी इस चर्चा का हिस्सा हैं.

अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तृत जानकारी

बैठक के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी. इसके तहत विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री विभिन्न वैश्विक मुद्दों और उनके भारत पर संभावित प्रभावों को लेकर प्रस्तुति देंगे.

विपक्ष के कई नेताओं की मौजूदगी

वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी कई नेता इस बैठक में शामिल हुए हैं. समाजवादी पार्टी से जावेद अली, आम आदमी पार्टी से संजय सिंह, डीएमके से कलानिधि वीरासामी, शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत, एनसीपी (शरद पवार गुट) से सुप्रिया सुले, टीडीपी से लवू कृष्णा और आरजेडी से अभय कुशवाहा शामल हुए है. इसके अलावा एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बैठक में शामिल होने की जानकारी है.

युद्ध पर बोले पीएम मोदी

आपको बता दें कि राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्ट एशिया में जारी युद्ध पर विस्तृत जानकारी दी थी और इसके भारत पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि यह संघर्ष चिंताजनक है और इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और देश के हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है.

'वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट'

प्रधानमंत्री ने कहा था कि वेस्ट एशिया में चल रहा युद्ध वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा कर रहा है. इसके चलते पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है. भारत जैसे देश जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है. उन्होंने बताया कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो रही है.