PM मोदी का वीडियो हटाना Meta को पड़ा भारी! भारत ने ग्लोबल टीम को किया तलब, होंगे कई बड़े सवाल
भारत सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को तलब कर कई अहम मुद्दों पर जवाब मांगा है. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटने, बाल सुरक्षा, एल्गोरिदम और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे विषय प्रमुख रहेंगे.
भारत सरकार और मेटा के बीच एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें सोशल मीडिया मंचों की जवाबदेही और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होगी. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा की वैश्विक टीम को भारत बुलाया है. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो कुछ समय के लिए हटने की घटना के अलावा बाल सुरक्षा, आपत्तिजनक सामग्री और भारतीय कानूनों के पालन जैसे विषयों पर भी विस्तार से सवाल पूछे जाएंगे.
सरकार ने मेटा से मांगा विस्तृत जवाब
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि 5 और 6 अगस्त को प्रस्तावित बैठक में मेटा के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख और इंस्टाग्राम के तकनीकी अधिकारियों को बुलाया गया है. सरकार जानना चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक वीडियो को कुछ समय के लिए हटाने जैसी घटना कैसे हुई. मेटा ने पहले इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पोस्ट को दोबारा बहाल कर दिया था और खेद भी जताया था. हालांकि सरकार इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर विस्तृत जानकारी चाहती है.
बाल सुरक्षा और एल्गोरिदम भी जांच के दायरे में
बैठक में केवल वीडियो हटने का मामला ही नहीं उठेगा, बल्कि बाल यौन शोषण और दुरुपयोग से जुड़ी सामग्री की रोकथाम, कृत्रिम रूप से तैयार किए गए कंटेंट की निगरानी और वेरिफाइड खातों पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी चर्चा का हिस्सा होगी. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग पहले ही इस विषय पर मेटा को नोटिस जारी कर चुका है. सरकार यह भी समझना चाहती है कि ऐसे मामलों की पहचान और रोकथाम के लिए कंपनी की तकनीकी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और उसमें किन सुधारों की आवश्यकता है.
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भारतीय कानूनों के पालन पर रहेगा विशेष जोर
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत में काम करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म को देश के कानूनों और नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा. अधिकारियों का कहना है कि मेटा जैसी वैश्विक कंपनियों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके एल्गोरिदम निष्पक्ष हों और सार्वजनिक व्यवस्था तथा संवेदनशील मामलों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद रहें. इस बीच संसदीय समिति ने भी सोशल मीडिया मंचों की जवाबदेही पर चिंता जताई है और सुझाव दिया है कि नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.