मुंबई: पिछले लंबे समय से आरक्षण और सामाजिक न्याय की मांग को लेकर आंदोलनरत मराठा समुदाय के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है. महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए इस पूरे समुदाय को ओबीसी श्रेणी के तर्ज पर वित्तीय और शैक्षणिक सुविधाएं देने का एलान किया है. इस नए फैसले के तहत राज्य सरकार मराठा युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए कुल आठ नई जनकल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत करने जा रही है. सरकार के इस कदम से समाज में व्यापक बदलाव आने की उम्मीद है.
इस नए सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक, मराठा समुदाय के छात्र-छात्राओं को अब वे सभी शैक्षणिक लाभ और छूट मिलेंगी जो अब तक केवल ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को मिलती रही हैं. इसके तहत स्कूल छोड़ने की परीक्षा (मैट्रिकुलेशन) के बाद मिलने वाली स्कॉलरशिप योजना को नए सिरे से लागू किया जाएगा, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे. इस पहल से ग्रामीण इलाकों के लाखों छात्र सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे.
रोजगार के नए अवसर पैदा करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी सरकार ने इस पैकेज में विशेष ध्यान रखा है. इसके तहत मराठा समाज के बेरोजगार युवाओं के लिए एक विशेष मोटर वाहन चालक (ड्राइवर) प्रशिक्षण योजना शुरू की जा रही है. इस योजना के माध्यम से युवाओं को न केवल मुफ्त में ड्राइविंग सिखाई जाएगी, बल्कि उन्हें कमर्शियल लाइसेंस प्राप्त करने और परिवहन क्षेत्र में अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने में भी पूरी मदद दी जाएगी.
शिक्षा की नींव को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने माध्यमिक (Secondary) और उच्चतर माध्यमिक (Higher Secondary) स्तर के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष स्कॉलरशिप योजना का खाका तैयार किया है. स्कूल स्तर पर मिलने वाली इस वित्तीय सहायता से मराठा समुदाय के ड्रॉप-आउट रेट में कमी आएगी. अधिकारियों का मानना है कि इस छात्रवृत्ति राशि से गरीब माता-पिता पर अपने बच्चों की फीस और किताबों का खर्च उठाने का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा.
इस नीतिगत फैसले का सबसे अनोखा और दूरगामी पहलू यह है कि इसका दायरा केवल महाराष्ट्र राज्य की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहेगा. महाराष्ट्र के मूल निवासी जो छात्र उच्च शिक्षा या तकनीकी ज्ञान के लिए दूसरे राज्यों में गए हैं, उन्हें भी इस योजना के दायरे में शामिल किया गया है. अन्य राज्यों के एडेड (अनुदानित) और अनएडेड (गैर-अनुदानित) संस्थानों में वोकेशनल यानी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले मराठा छात्रों को भी यह लाभ मिलेगा.
कैबिनेट नोट में साफ किया गया है कि वर्तमान में ओबीसी श्रेणी के नागरिकों और छात्रों पर लागू होने वाली सभी प्रकार की शैक्षणिक रियायतें, फीस माफी और स्कॉलरशिप के नियम अब पूरी तरह से मराठा समुदाय के लिए भी मान्य होंगे. कई सालों से जारी कानूनी और सामाजिक गतिरोध के बीच सरकार का यह फैसला मराठा आंदोलनकारियों के गुस्से को शांत करने और समाज के पिछड़े तबके को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक प्रयास माना जा रहा है.