अजित पवार के मौत के बाद मंत्रालयों पर छिड़ा घमासान, भारी विभागों पर NCP ने ठोका दावा; CM फडणवीस से मिलने पहुंचे ये तीन नेता

अजित पवार की मौत के बाद महाराष्ट्र में मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर जबरदस्त लड़ाई छिड़ गई है. एनसीपी ने वित्त और उत्पाद शुल्क जैसे विभागों पर अपना दावा ठोका है. तीन सीनियर नेता मुख्यमंत्री फडणवीस से मिलने 'वर्षा' पहुंचे.

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Km Jaya

मुंबई: उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में अचानक मौत के बाद, महाराष्ट्र की राजनीति में मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर सत्ता संघर्ष शुरू हो गया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि अजित पवार के पास रहे सभी विभाग पार्टी के पास ही रहें.

NCP के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके सरकारी आवास 'वर्षा' में मुलाकात की. पार्टी का मुख्य मकसद कैबिनेट में अजित पवार के पास रहे महत्वपूर्ण विभागों पर अपना कब्जा बनाए रखना है.

NCP नेताओं की क्या है मांग?

NCP नेतृत्व जल्द ही मुख्यमंत्री को एक औपचारिक पत्र सौंपेगा, जिसमें मांग की जाएगी कि अजित पवार के पूर्व विभाग – वित्त, राज्य उत्पाद शुल्क और खेल पूरी तरह से NCP के कोटे में ही रहें.

पार्टी का मानना ​​है कि गठबंधन सरकार में सत्ता का संतुलन बनाए रखने के लिए इन मंत्रालयों को अपने पास रखना जरूरी है. मुख्यमंत्री और गठबंधन सहयोगियों के बीच इन विभागों का प्रभार किसे दिया जाएगा, इस पर गहन चर्चा चल रही है.

मुख्यमंत्री के साथ चर्चा में किस बात पर दिया गया जोर?

अजित पवार की मौत से पैदा हुए खालीपन को भरने के लिए, NCP के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री के साथ लंबी चर्चा की. प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल जैसे नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के पास रहे विभाग किसी अन्य गठबंधन सहयोगी को नहीं दिए जाने चाहिए. इस बैठक का मकसद न केवल प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाना था, बल्कि इसे पार्टी के भविष्य के नेतृत्व का संकेत देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

NCP को किस बात की है चिंता?

अजित पवार के पास वित्त और राज्य उत्पाद शुल्क जैसे बेहद शक्तिशाली मंत्रालय थे. ये विभाग राज्य के खजाने और राजस्व पर सीधा नियंत्रण देते हैं. NCP को चिंता है कि अगर ये विभाग किसी दूसरी पार्टी के पास चले जाते हैं, तो गठबंधन में उसका प्रभाव कम हो सकता है. इसलिए, पार्टी अब भविष्य में किसी भी विवाद से बचने के लिए इन मंत्रालयों पर लिखित रूप में औपचारिक रूप से अपना दावा ठोकने की तैयारी कर रही है.