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'रामलला को देखने आते थे भगवान हनुमान', मूर्ति बनाने वाले अरुण योगीराज ने शेयर किया ईश्वरीय किस्सा

अरुण योगीराज की कला का हर कोई मुरीद हो गया है. रामलला की मूर्ति से पहले भी अरुण ने कई मूर्तियां बनाई हैं. अरुण ने केदारनाथ में स्थापित की गई आदि गुरू शंकराचार्य की मूर्ति बनाई थी. इसके साथ ही हाल में इंडिया गेट पर स्थापित की गई सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को भी अरुण योगी राज ने ही बनाया था. जिसको लेकर लोगों ने अरूण की खूब तारीफ की थी.

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Om Pratap
Lord Hanuman used to come to see Ramlala idol

हाइलाइट्स

  • 7 महीने तक चला था रामलला की मूर्ति का निर्माणकार्य
  • शंकराचार्य और सुभाष चंद्र बोस की भी बना चुके हैं मूर्ति

Lord Hanuman used to come to see Ramlala idol: अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को बनाने वाले कर्नाटक के अरुण योगीराज ने रोमांचक ईश्वरीय किस्सा शेयर किया है. इससे पहले भी रामलला की मूर्ति को लेकर उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया था. अरुण योगीराज के मुताबिक, जब वे रामलला की मूर्ति बना रहे थे तब भगवान हनुमान बन रही रामलला की मूर्ति को देखने के लिए रोजाना आते थे. दरअसल, एक न्यूज चैनल से इंटरव्यू में उन्होंने इन रहस्यभरी बातों का खुलासा किया.

अरुण योगीराज ने बताया कि जब वे रामलला की मूर्ति बना रहे थे, तब रोजाना शाम को एक बंदर उनके घर के कैंपस में आता था और रामलला की मूर्ति को निहारता था. अरुण योगीराज के मुताबिक, वो बंदर साक्षात भगवान हनुमान थे, इसकी अनुभूति उन्हें हुई थी. योगीराज ने इस ईश्वरीय चमत्कारिक किस्से का जिक्र श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी किया था. 

7 महीने तक चला था मूर्ति निर्माण का काम

अरुण योगीराज के मुताबिक, 7 महीने तक पत्थर को तराशने के बाद रामलला की मूर्ति तैयार की थी. उन्होंने मूर्ति बनाने के दौरान का किस्सा शेयर करते हुए कहा कि जब मैं मूर्ति बना रहा था, तब मुझे सपने में भगवान राम के दर्शन भी हुए थे. उन्होंने सपने वाले किस्से के बारे मे विस्तार से बताते हुए कहा कि जब मैं रामलला के चेहरे का निर्माण करने जा रहा था, तब समझ नहीं आ रहा था कि आखिर रामलला का चेहरा कैसे बनाऊं, कैसा आकार दूं. इन सभी बातों को सोचने के क्रम में कई दिनों तक मुझे नींद नहीं आई. कई बार तो मैं ये सोचता था कि जिस रामलला की मूर्ति को मैं बना रहा हूं, उनकी पूजा के लिए देश दुनिया से लोग आएंगे, ऐसे में मैं काफी दबाव में था कि आखिर उनके चेहरे को कैसा आकार दूं.

योगीराज ने बताया कि एक दिन ये सब बातें सोचते-सोचते मैं सो गया और तभी सपने में भगवान राम बालस्वरूप में आए और जैसा उनका चेहरा दिखा, वैसे ही मैंने रामलला की मूर्ति का चेहरा बना दिया. बता दें कि इससे पहले भी अरुण योगीराज ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि जब प्राण प्रतिष्ठा के बाद मैंने रामलला की मूर्ति देखी, तो हैरान रह गया. मुझे लगा कि जो मूर्ति मैंने बनाई थी, वो बदल गई है. दरअसल, उनका मानना था कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला का जो चेहरा सामने आया, वो अलौकिक और दिव्य था. इसलिए मुझे लगा कि शायद मूर्ति बदल गई है. 

शंकराचार्य और सुभाष चंद्र बोस की भी बना चुके हैं मूर्ति

अरुण योगीराज की कला का हर कोई मुरीद हो गया है. रामलला की मूर्ति से पहले भी अरुण ने कई मूर्तियां बनाई हैं. अरुण ने केदारनाथ में स्थापित की गई आदि गुरू शंकराचार्य की मूर्ति बनाई थी. इसके साथ ही हाल में इंडिया गेट पर स्थापित की गई सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को भी अरुण योगी राज ने ही बनाया था. जिसको लेकर लोगों ने अरूण की खूब तारीफ की थी.

योगीराज के बारे में चंपत राय ने क्या कहा था?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार को अरुण योगीराज के काम के बारे में जानकारी शेयर की. इस दौरान चंपत राय ने अरुण योगीराज के एकाग्रता और समर्पण भावना की जमकर तारीफ की. उन्होंने बताया कि मूर्ति बनाते समय किसी तरह की कोई बाधा न हो, इसके लिए योगीराज ने महीनों तक अपने परिवार वालों से बात तक नहीं की. उन्होंने बच्चों का चेहरा तक नहीं देखा.चंपत राय ने कहा कि प्रतिमा के निर्माण कार्य के दौरान अरुण योगीराज ने जिस तरह अपना जीवन व्यतीत किया, उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. काम के दौरान उन्होंने महीनों तक फोन तक नहीं छुआ. यहां तक ​​कि वह अपने बच्चों और परिवार से भी बात नहीं करते थे.

अरुण योगीराज की मां ने जताई थी खुशी

अरुण योगीराज की मां सरस्वती ने बेटे के कारीगरी पर खुशी जताई थी. उन्होंने कहा था कि मैं बहुत खुश हूं. यह पिछले छह महीनों में उसने जो किया उसका परिणाम है. यह हमारे लिए सबसे खुशी का पल है.मैं अपने बेटे की प्रगति और उसकी सफलता को देखकर खुश हूं. उसके पिता उसकी सफलता को देखने के लिए मौजूद नहीं हैं, मेरे बेटे को अयोध्या गए 6 महीने हो गए हैं. मेरे तीन बच्चे हैं. सूर्य प्रकाश, चेतना और अरुण. हम कई वर्षों से इस मूर्तिकला में लगे हुए हैं. चार पीढ़ियां हो गई हैं.