राज्यसभा में पूर्ण बहुमत के करीब बीजेपी, क्या अब संसद में बदल जाएगा पूरा खेल? समझिए लोकसभा-राज्यसभा का गणित

लोकसभा को संसद का अधिक शक्तिशाली सदन माना जाता है, लेकिन राज्यसभा में पूर्ण बहुमत मिलने से बीजेपी के लिए सामान्य विधेयक पारित कराना आसान हो सकता है. हालांकि संविधान संशोधन सहित कई मामलों में दोनों सदनों की मंजूरी अनिवार्य रहेगी.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारतीय संसद दो सदनों- लोकसभा और राज्यसभा- से मिलकर बनी है. दोनों की अपनी-अपनी संवैधानिक भूमिका और शक्तियां हैं. हालांकि अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर दोनों में ज्यादा ताकत किसके पास है. इसी बीच बीजेपी के राज्यसभा में सबसे बड़ी और पूर्ण बहुमत वाली पार्टी बनने की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि लोकसभा और राज्यसभा की शक्तियों में क्या अंतर है और अगर बीजेपी राज्यसभा में पूर्ण बहुमत हासिल करती है तो इसका उसे क्या लाभ मिल सकता है.

लोकसभा को क्यों माना जाता है ज्यादा शक्तिशाली?

संविधान के अनुसार लोकसभा को संसद का अधिक प्रभावशाली सदन माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार लोकसभा के प्रति जवाबदेह होती है. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद तभी तक पद पर बने रहते हैं, जब तक उन्हें लोकसभा का विश्वास प्राप्त होता है.

इसके अलावा मनी बिल केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है. राज्यसभा इस पर केवल अपनी सिफारिशें दे सकती है, जिन्हें स्वीकार करना या नहीं करना लोकसभा पर निर्भर करता है. केंद्रीय बजट और वित्तीय मामलों में भी अंतिम निर्णय लेने की प्रमुख भूमिका लोकसभा की होती है.


राज्यसभा की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं

राज्यसभा को संसद का स्थायी सदन कहा जाता है, क्योंकि इसे कभी भंग नहीं किया जाता. इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं और नए सदस्य चुने जाते हैं.

सामान्य विधेयकों को कानून बनने के लिए राज्यसभा की मंजूरी भी आवश्यक होती है. संविधान संशोधन विधेयकों के लिए भी दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है. इसके अलावा अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा राष्ट्रीय हित में संसद को राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की अनुमति दे सकती है. अखिल भारतीय सेवाओं के गठन में भी राज्यसभा की विशेष भूमिका होती है.

बीजेपी को राज्यसभा में पूर्ण बहुमत मिलने से क्या होगा?

वर्तमान में बीजेपी राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है और बहुमत के हिसाब से कुछ ही सीटें कम रह गई है. यदि बीजेपी राज्यसभा में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल कर लेती है, तो सरकार के लिए कई मामलों में विधायी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है.

सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सामान्य विधेयकों को पारित कराने के लिए अन्य दलों के समर्थन पर निर्भरता कम हो जाएगी. अब तक कई मौकों पर राज्यसभा में पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण सरकार को सहयोगी दलों या विपक्ष के कुछ दलों का समर्थन जुटाना पड़ता रहा है.

राज्यसभा में मजबूत संख्या होने से संसदीय समितियों में भी पार्टी का प्रभाव बढ़ सकता है. साथ ही सरकार अपने दीर्घकालिक विधायी एजेंडे को अधिक सहजता से आगे बढ़ाने की स्थिति में होगी.

क्या इसके बाद सभी कानून आसानी से बन जाएंगे?

ऐसा नहीं है. राज्यसभा में बहुमत मिलने के बावजूद हर विधेयक अपने आप कानून नहीं बन जाएगा. संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है. इसके अलावा न्यायिक समीक्षा, संघीय व्यवस्था और संवैधानिक प्रावधान संसद की शक्तियों पर संतुलन बनाए रखते हैं.

यानी राज्यसभा में पूर्ण बहुमत सरकार की स्थिति को निश्चित रूप से मजबूत करेगा, लेकिन इससे सभी संवैधानिक प्रक्रियाएं समाप्त नहीं हो जातीं और कई महत्वपूर्ण मामलों में व्यापक राजनीतिक सहमति की जरूरत बनी रहती है.

लोकसभा और राज्यसभा दोनों भारतीय लोकतंत्र के अहम स्तंभ हैं. जहां लोकसभा को सरकार के गठन, वित्तीय मामलों और राजनीतिक जवाबदेही के कारण अधिक शक्तिशाली माना जाता है, वहीं राज्यसभा संघीय ढांचे की रक्षा करने और विधायी प्रक्रिया को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यदि बीजेपी राज्यसभा में पूर्ण बहुमत हासिल करती है, तो उसके लिए सामान्य विधेयकों को पारित कराना और अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है. हालांकि संविधान संशोधन और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में दोनों सदनों की भूमिका पहले की तरह ही बनी रहेगी.