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Lok Sabha Election 2024: Modi ka Parivar पर रार, राजस्थान में इन परिवारों ने जमकर बढ़ाया राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद

Lok Sabha Elections 2024: राजस्थान की राजनीति में वंशवाद और परिवारवाद का बोलबाला खूब देखने के लिए मिलता है. यहां बीजेपी, कांग्रेस और अन्य दलों मं कई घराने ऐसे हैं, जिन्होंने अपने वंश और परिवार के लोगों को राजनीति में आगे बढ़ाया है.

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Pankaj Soni

Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव से पहले परिवारवाद को लेकर बीजेपी दूसरी राजनीतिक पार्टियों को घेरना चाहती है. इसलिए बीजेपी 'मोदी का परिवार' मुहिम शुरू की है. पीएम मोदी लगाातार कांग्रेस पर परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं. हमारी सीरीज 'मोदी का परिवार पर रार' में आज हम आपको राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों में परिवारवाद के बारे में बताने जा रहे हैं.  

हरिदेव जोशी परिवार

राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री रह चुके नेताओं के वंशवाद की शुरुआत हरिदेव जोशी से होती हैं. हरिदेव जोशी के पुत्र दिनेश जोशी ने विधायक का चुनाव लड़ा, लेकिन पहला चुनाव हार गए. इसके बाद दोबारा राजनीति में नहीं आए. 

मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया 

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया के परिवार की पत्नी शांति पहाड़िया विधायक और सांसद रह चुकी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया के परिवार में पत्नी इंदुबाला एक बार सांसद बन चुकी हैं. पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर भैरोंसिंह शेखावत ने अपने परिवार से दामाद नरपत सिंह राजवी को आगे बढ़ाया था. राजवी एक बार राज्य में मंत्री रह चुके हैं और विधायक भी रह चुके हैं. 

वसुंधरा राजे परिवार

राजस्थान की मुख्य़मंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे बीजेपी से हैं और वह एक राज घराने से ताल्लुक रखती हैं. उनके पुत्र दुष्यंत सिंह झालावाड़ से 4 बार सांसद रह चुके हैं.  

अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी वंशवाद की राजनीति को सींचने का काम किया है. अपने पुत्र वैभव गहलोत को राजनीति में स्थापित करने का जतन करते आ रहे हैं. सांसद के चुनाव में बुरी तरह हारे वैभव गहलोत फिलहाल पार्टी संगठन में सक्रिय होने के साथ पीसीसी महासचिव हैं. 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. 

भरतपुर में सबसे बड़ा राज परिवार

भरतपुर राजपरिवार का राजस्थान की राजनीति में आजादी के बाद से आज तक जलवा बरकरार है. 1952 के पहले आम चुनाव में इस परिवार के गिरिराजशरण सिंह उर्फ राजा बच्चू सिंह भरतपुर सीट से सांसद बने थे. उनके भाई राजा मानसिंह ने कुम्हेर से विधायक बने थे. इस परिवार से महाराजा बृजेंद्र सिंह, विश्वेंद्र सिंह, कृष्णेंद्र कौर दीपा, दिव्या सिंह सांसद बन चुके हैं. वहीं राजा मानसिंह, अरुण सिंह, विश्वेंद्र सिंह, दिव्या सिंह और कृष्णेंद्र कौर दीपा विधायक चुने गए. दीपा राजस्थान सरकार में मंत्री रह चुकी हैं 

राजस्थान की राजनीति में इन परिवारों का दिखा दखल

- नाथूराम मिर्धा- रामनिवास मिर्धा, हरेंद्र मिर्धा, रिछपाल मिर्धा
- पूनमचंद विश्नोई- विजयलक्ष्मी, रामसिंह, मलखान सिंह
- परसराम मदेरणा- महिपाल मदेरणा, लीला मदेरणा
- राजेश पायलट- सचिन पायलट, रमा पायलट
- जसवंत सिंह- मानवेंद्र
- शीशराम ओला- बृजेंद्र ओला

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