नई दिल्ली: जैसे-जैसे 2024 लोकसभा चुनाव का चुनावी समर नजदीक आ रहा है, देश की सियासी फिजा बदली-बदली सी नजर आ रही है. देश की राजनीतिक पटल पर उभरता हुआ इंडिया गठबंधन मोदी सरकार को आम चुनाव में पटखनी देने के इरादे से अपनी चुनावी रणनीतियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है.
अब तक इंडिया गठबंधन की चार बैठकें हो चुकी हैं. संयुक्त विपक्ष की पहली बैठक 23 जून को पटना में और दूसरी बैठक 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में हुई. तीसरी बैठक 31अगस्त 1 सितंबर को मुंबई में हुई और चौथी बैठक 19 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई. चौथी बैठक में 28 पार्टियों ने हिस्सा लिया और गठबंधन की कमेटी के सामने अपने विचार रखे. इंडिया गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाली NDA गठबंधन ते सामने सियासी तौर पर बड़ी चुनौती पेश करना चाहती हैं.
इंडिया गठबंधन को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, उनमें सीट शेयरिंग फॉर्मूले के साथ-साथ पीएम के चेहरे पर विपक्षी दलों को भरोसे में लेते हुए सर्वानुमती बनाना है. बीते दिनों इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे का नाम प्रस्तावित किया गया. सीएम ममता बनर्जी और केजरीवाल की तरफ से पीएम चेहरे के तौर पर नाम प्रस्तावित किये जाने के बाद खड़गे ने साफ तौर पर इंकार करते हुए बड़ा सियासी दांव चला है.
पीएम चेहरे पर खरगे ने दो टूक अपना रूख साफ करते हुए लोकसभा चुनावों के बाद पीएम चेहरे के चयन की बात कही. ऐसे में इंडिया गठबंधन में पीएम चेहरे पर मची रार को खरगे ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से ठंडे बस्ते में डाल दिया. पीएम पद को लेकर बिहार के सीएम नितीश कुमार की सियासी महत्वाकाक्षां किसी से छिपी नहीं है. बीते दिनों इंडिया गठबंधन के दौरान नीतीश कुमार की नराजगी की वजह सियासी हलकों में सुर्खियां बन रही थी. मौजूदा राजनीतिक हालात को भांपते हुए नीतीश कुमार ने बयान जारी करते हुए नराजगी की खबरों को सीरे से खारिज कर दिया.
आगामी 2024 लोकसभा चुनाव सिर्फ चार महीने दूर हैं, सीटों का आवंटन गठबंधन के लिए सबसे अहम कड़ी है. हालिया विधानसभा चुनाव में करारी असफलताओं के बाद इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के सेय को लेकर दबे स्वर में आवाज उठने लगे है. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कमलनाथ के बीच आरोप प्रत्यारोप को लेकर दोनों दलों के बीच मनमुटाव पैदा हो गया था, हालाकिं कांग्रेस हाईकमान संतुलन के साथ अखिलेश यादव को भरोसे में लेते हुए इस मामले का पटाक्षेप करने में लगा हुआ है. जिससे यूपी में बीजेपी की जोरदार घेराबंदी की जा सके. बीते दिनों अखिलेश यादव ने बड़ा दिल दिखाने की बात कहते हुए सियासी सामंजस्य और संतुलन के साथ सीट बंटवारे की बात कही है. ऐसे में अब देखना यह काबिले गौर होगा कि सपा और कांग्रेस किस सेट फॉर्मूले के साथ चुनावी रणक्षेत्र में हुंकार भरते है.
बीते दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डाले तो यह बात सीसे की तरह साफ है कि कांग्रेस और सपा के बीच सियासी शीत युद्ध चल रहा है. कांग्रेस और सपा के बीच सियासी तल्खियों की खबरें सियासी हलकों में चर्चा के केंद्र में रही है. बीते दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जाति जनगणना को लेकर अपने सहयोगी दल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. कांग्रेस की ओर से जातिय जनगणना का मुद्दा उछाले जाने पर अखिलेश यादव मे बड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कांग्रेस वह पार्टी है जिसने आजादी के बाद जाति जनगणना नहीं कराई. जब लोकसभा में सभी दल जाति जनगणना की मांग कर रहे थे, तब उन्होंने जाति जनगणना नहीं कराई. ऐसे में अगर अब कांग्रेस इस मुद्दे के साथ आगे आना चाहती है तो हम सबको मिलकर एक मंच पर काम करना होगा.
एक नई तस्वीर बीते दिनों इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान उभर कर सामने आई. जहां सपा नेता रामगोपाल यादव ने कांग्रेस से बसपा को लेकर स्टैंड क्लियर करने को कहा. दरअसल इंडिया गठबंधन की बैठक में सपा नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि कांग्रेस को यह तस्वीर साफ करना चाहिए कि क्या वे बीएसपी के संपर्क में है? ऐसी जानकारी मिल रही है कि कांग्रेस बीएसपी से गठबंधन करने के पक्ष में है. इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हमें किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. रामगोपाल ने बैठक में स्पष्ट किया कि अगर बसपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनती है तो सपा गठबंधन से खुद को अलग कर लेगी. अगर बसपा इस गठबंधन का हिस्सा बनती है तो तो सपा इसका हिस्सा बनने को तैयार नहीं होगी. उनकी बातें सुनी गई और उनकी बात समझी गई और इस पर खरगे साहब ने कहा कि अफवाहों को तूल न दें. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और सपा की दोस्ती कितनी परवान चढ़ती है और 2024 महासमर में क्या गुल खिलाती है?