menu-icon
India Daily

Explainer: क्या होता है Electoral Bond, 5 सालों में कौन सी पार्टी हुई सबसे ज्यादा मालामाल, जानें पूरी डिटेल

Electoral Bond: चुनाव आयोग की जो आकड़े जारी किये गए है. वो इस बात की तस्दीक कर रहे है कि सियासी दलों की तिजोरी मालामाल है.चुनावी मौसम में इलेक्टोरल बॉन्ड की कानूनी वैधता लेकर दायर की गयी याचिका को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच आपसी खींचतान चर्चा के केंद्र में है.

Avinash Kumar Singh
Explainer: क्या होता है Electoral Bond, 5 सालों में कौन सी पार्टी हुई सबसे ज्यादा मालामाल, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चुनावी चंदे को लेकर आंकड़े जारी किए हैं जिसके तहत एक बात तो साफ हो जाती है कि सियासी दलों की तिजोरी इस समय भरी हुई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त इलेक्टोरल बॉन्ड की कानूनी वैधता को लेकर एक याचिका दायर की गई है और पारदर्शिता को लेकर सुनवाई हो रही है. इस स्कीम को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच आपसी खींचतान चर्चा के केंद्र में है. 

इलेक्टोरल बॉन्ड के खिलाफ चुनौती देने वाली याचिकाओं में चंदा देने वाले की पहचान गुप्त रखने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर चंदा देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है तो इससे काले धन को बढ़ावा मिल सकता है. क्या इसे बड़े कारोबारियों को उनकी पहचान बताए बिना पैसे डोनेट करने में मदद करने के लिए बनाया गया था?

'चुनावी बांड के साधन को जानने का सामान्य अधिकार नहीं'

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि ऐसा क्यों है कि जो पार्टी सत्ता में है, उसे ज्यादा चंदा मिलता है? इस सवाल पर सरकार की तरफ से  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब देते हुए कहा कि चंदा देने वाला हमेशा किसी पार्टी की मौजूदा हैसियत से चंदा देता है. बीते 30 अक्टूबर को भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने इस स्कीम पर अपनी राय जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नागरिकों को चुनावी बांड के साधन को जानने का सामान्य अधिकार नहीं है. इलेक्टोरल बॉन्ड मे मिलने वाले चंदे पारदर्शिता को बढ़ावा देते है.

जानें किस दल की कितना मिला इलेक्टोरल बॉन्ड?

सियासी दलों की ओर से चुनाव आयोग को साझा की गयी जानकारी के मुताबिक बीते पांच सालों में इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये का फंड पॉलिटिकल पार्टियों को मिला है. इसमें से आधे से ज्यादा पैसे इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए BJP को मिले है. बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए कुल 5,271.97 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई है, जबकि कांग्रेस को 952.9 करोड़ का रकम चंदा के रूप में मिला है. वहीं हम क्षेत्रीय दल की बात करें तो ममता बनर्जी की TMC को 767.88 करोड़ ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की पार्टी BJD को 622 करोड़ और तमिनलाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK को 431.50 करोड़, AAP को 48.83 करोड़, JDU को 24.40 करोड़, NCP को 51.5 करोड़ रुपये की इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए फंडिंग हुई है.

जानें क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड?

देश में साल 2018 में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को कानूनी रूप से लागू किया गया था. इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार ने यह तर्क दिया था कि इससे राजनीतिक दलों को होने वाली फंडिंग में ट्रांसपरेंसी आएगी और बेहिसाब नकदी काला धन के इस्तेमाल पर रोक लगेगा. ये बॉन्ड 1000, 10 हजार, 1 लाख और 1 करोड़ रुपये तक के हो सकते हैं. देश का कोई भी नागरिक या कंपनी किसी भी राजनीतिक पार्टी को चंदा देना चाहते हैं तो उसे बॉन्ड खरीदना होगा. चुनावी बॉन्ड में डोनर का नाम नहीं होता. इस बॉन्ड को खरीदकर आप जिस पार्टी को चंदा देना चाहते हैं इस पर उसका नाम लिखते हैं. इस बॉन्ड को आप बैंक को वापस कर सकते हैं और अपना पैसा वापस ले सकते हैं, लेकिन एक तय समय सीमा के अंदर आपको यह सब औपचारिकताएं करनी पड़ेगी.

जानें इलेक्टोरल बॉन्ड प्राप्त करने की अनिर्वाय शर्त?

दरअसल इलेक्टोरल बॉन्ड केवल वे राजनीतिक दल ही इन्हें प्राप्त कर सकते हैं, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं. जिन्हें पिछले लोकसभा या राज्य चुनाव में एक प्रतिशत से अधिक वोट मिले हों. चुनावी बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से मिलते हैं. हर साल जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीने में 10 दिनों के लिए चुनावी बॉन्ड की बिक्री होती है. बॉन्ड खरीदने के 15 दिन के अंदर इसका इस्तेमाल करना होता है. एसबीआई की जिन 29 शाखाओं से इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे जा सकते हैं, वे नई दिल्ली, गांधीनगर, चंडीगढ़, बेंगलुरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर, भोपाल, मुंबई, जयपुर, लखनऊ समेत कई शहर में हैं.

यह भी पढ़ें: Bihar Teacher Recruitment: 'यह तो अभी शुरुआत है...' , 1 लाख 20 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी नियुक्ति पत्र देगी बिहार सरकार