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कश्मीर घाटी में चुन-चुनकर मारे जा रहे लोग, दहशत के साए में वोटिंग कैसे करवाएगा चुनाव आयोग?

कश्मीर एक बार फिर दहशत के साए में हैं. यहां बेहद कम वोट पड़ते हैं, उसमें भी लगातार बढ़ रही टार्गेट किलिंग की वजह से एक बार फिर चुनाव पर संकट मंडरा रहा है.

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India Daily Live
Kashmir Valley
Courtesy: India Daily

अप्रैल का महीना और कश्मीर में 23 दिनों के भीतर 3 हत्याएं. ऐसा लग रहा है कि टारगेट किलिंग का दौर लौट आया है. राजौरी में सोमवार देर रात मोहम्मद रज्जाक नाम के एक शख्स की हत्या हो गई है, वह शहादरा शरीफ का रहने वाला था. मोहम्मद रज्जाक सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में काम करते थे. आतंकियों ने उन पर फायरिंग की और उन्हें अस्पताल में दम तोड़ दिया. कश्मीर में भी लोकसभा चुनावों की जमकर कैंपेनिंग हो रही है लेकिन टारगेट किलिंग का दौर लौट आया है. ऐसे में चुनाव कैसे होंगे, यह बड़ा सवाल है.

कश्मीर में एक तरफ जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस से लेकर पीडीपी तक चुनावी कैंपेन में जुटी हैं, हत्याएं थम नहीं रही हैं. पहले 2 गैर कश्मीरियों की हत्या की गई थी. 17 अप्रैल को अनंतनाग में बिहार के शंकर शाह की हत्या की गई थी, वहीं 8 अप्रैल को दक्षिण शोपियां में दिल्ली परमजीत सिंह को गोली मार दी थी. यह लगातार हो रहा है. ऐसे में चुनावी माहौल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

किन लोगों को मार रहे हैं आतंकी?
आतंकियों के निशाने पर सरकारी कर्मचारी और प्रवासी हैं. प्रवासियों को मारने की घटनाए हाल के दिनों में बढ़ी हैं. कश्मीरी पंडितों को भी चुन-चुनकर मारा जा रहा है. स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं की भी हत्याएं हुई हैं. दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों को भी आतंकी नहीं छोड़ रहे हैं. कश्मीर में अचानक से दोबारा पनप रहे आतंकवाद की वजह से लोगों की टेंशन बढ़ गई है. 

फिर भी किस साहस से AFSPA हटा रहा गृहमंत्रालय?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सरकार कश्मीर से आर्म्ड फोर्सेज स्पेशस पावर एक्ट (AFSPA) हटाने की तैयारी कर रही है. अमित शाह खुद ऐसे इशारे कर चुके हैं. कश्मीर में 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव भी कराए जाने की तैयारी हो रही है. इन तैयारियों को फिर से रोकना पड़ेगा अगर ऐसी ही टारगेट किलिंग होती रही.

कश्मीर के सियासी अखाड़े में कौन-कौन सी पार्टियां?
कश्मीर की सियासत में कई राजनीतिक पार्टियों ने दमखम ठोका है. नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी यहां प्रमुखता से चुनाव लड़ रहे हैं. गुलाम नबी आजाद की प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी भी अलग चुनाव लड़ रही है. 

बारामुला लोकसभा सीट पर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गली लोन को आजाद समर्थन दे रहे हैं. कश्मीर घाटी की तीन लोकसभा सीटों पर बीजेपी ने अभी अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. अनंतनाग, श्रीनगर और बारामुला सीट पर बीजेपी ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि मंथन के बाद बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकती है.

कश्मीर घाटी में कब हैं चुनाव?
जम्मू और कश्मीर की अलग-अलग सीटों पर 5 चरणों में चुनाव हो रहे हैं. अनंतनाग और राजौरी लोकसभा सीट पर 7 मई को वोटिंग होगी, वहीं श्रीनगर में 13 मई को वोटिंग होगी. बारामूला में 20 मई को वोटिंग होगी. 

कम वोटिंग भी है प्रशासन के लिए चुनौती?
जम्मू और कश्मीर में वोटिंग प्रतिशत पहले से कम रही है. साल 2019 में राज्य में महज 48.3 फीसदी वोटिंग हुई थी. कश्मीर में आम लोग अब खौफ में हैं. अनंतनाग और राजौरी में हालात बेहद नाजुक हैं. लगातार हो रही हत्याओं से वोटर भी डरे हुए हैं.