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60 सेकंड में 900 राउंड फायरिंग, 600 मीटर मारक क्षमता; घाटी में अमेरिकी मेड M-4 कार्बाइन लेकर घूम रहे आतंकी

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन में अमेरिकन मेड एम-4 कार्बाइन बरामद किया है. अमेरिकी मेड ये बंदूक इतनी खतरनाक है कि ये एक मिनट यानी 60 सेकंड में 900 राउंड फायरिंग कर सकती है. दावा किया जा रहा है कि ये हाईटेक गन आतंकियों का है. इस अत्याधुनिक हथियार के मिलने के बाद सुरक्षाबलों की चिंता बढ़ गई है.

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60 सेकंड में 900 राउंड फायरिंग, 600 मीटर मारक क्षमता; घाटी में अमेरिकी मेड M-4 कार्बाइन लेकर घूम रहे आतंकी
Courtesy: social media

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान एक बंदूक बरामद की है, जो M-4 कार्बाइन बताई जा रही है. ये बंदूक अमेरिकी निर्मित है, जो एक मिनट में करीब 900 राउंड फायरिंग कर सकती है. इस बंदूक की मारक क्षमता 600 मीटर है. साथ ही इसकी कीमत 1500 से 2500 डॉलर तक बताई जा रही है. अत्याधुनिक बंदूक के बरामद होने के बाद सुरक्षाबलों की चिंताएं बढ़ गईं हैं. साथ ही ये सवाल भी कि आखिर आतंकियों के पास इतनी हाईटेक बंदूक कहां से आई?

इससे पहले भी घाटी में आतंकियों के पास से हाईटेक बंदूक बरामद हुई हैं. साथ ही कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आतंकियों के पास काफी अत्याधुनिक हथियार हैं. बुधवार को एम-4 कार्बाइन बरामद होने के बाद इसकी पुष्टि भी हो गई है. संभावना जताई जा रही है कि अफगानिस्तान में जब तालिबान का कब्जा हुआ तो वहां मौजूद कई अमेरिकी जवानों के हथियार छूट गए थे. संभव है कि यही हथियार अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हों. इससे पहले पिछले महीने भी ऑस्ट्रिया निर्मित असॉल्ट राइफल बरामद हुई थी.

कठुआ हमले के दौरान भी यूज किए गए थे एम-4 कार्बाइन

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने कठुआ में हुए आतंकी हमलों में भी आतंकियों ने अमेरिकी मेड एम-4 कार्बाइन का यूज किया था. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के दौरान कुछ हथियार छूट गए थे, जो अब आतंकियों से पास पहुंच गए हैं.

1980 के दशक में डिजाइन और विकसित की गई एम-4 कार्बाइन राइफलों का बड़े पैमाने पर नाटो देश करते हैं. इसके अलावा, पाकिस्तानी विशेष बल औऱ सिंध पुलिस की स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट समेत कई अन्य देशों की सेनाएं भी इसका यूज करती हैं.

कई देशों में गृहयुद्ध के दौरान भी यूज की गई है एम-4 कार्बाइन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम-4 कार्बाइन का यूज कई देशों में हुए गृहयुद्ध में भी किया गया है. इनमें सीरियाई, इराकी, यमनी, कोलंबियाई, कोसोवो गृहयुद्ध शामिल है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बंदूक में स्टील की गोलियां यूज की जाती है, जो इसे घातक बनाती है. इंडियन आर्मी में अपने कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में सेवा देने वाले रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI घाटी में आतंक फैलाने के लिए एम-4 कार्बाइन आतंकियों को मुहैया करा रही है.

2017 में सामने आई थी एम-4 कार्बाइन मिलने की पहली घटना

जम्मू-कश्मीर में एम-4 कार्बाइन मिलने की पहली घटना 7 नवंबर 2017 को उस वक्त सामने आई थी, जब आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के चीफ मसूद अजहर के भतीजे तल्हा रशीद मसूद को पुलवामा जिले में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था. तब से अब तक ये हथियार कई बार बरामद किया जा चुका है.