Jammu and Kashmir election 2024: जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड घोषणापत्र जारी कर दिया. घोषणापत्र में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए की प्रमुख सहयोगी जनता दल यूनाइटेड ने पत्थरबाजों और राजनीतिक कैदियों की रिहाई का वादा किया है.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी ने 18 सितंबर को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. जदयू का दावा है कि कई उम्मीदवार जो व्यवस्था से असंतुष्ट थे, अब दूसरे चरण में चुनाव लड़ रहे हैं, जिसके लिए 25 सितंबर को मतदान होगा. जेडीयू के घोषणापत्र में कहा गया है कि शांति और सुलह को बढ़ावा देने के लिए मामलों की समीक्षा की जाएगी और राजनीतिक कैदियों और पत्थरबाजों की रिहाई की सुविधा प्रदान की जाएगी.
जदयू की राज्य इकाई ने ये भी दावा किया है कि उसने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर पत्थरबाजों के मामलों की जांच करने और उन्हें जेलों से रिहा करने के लिए कहा है. जेडीयू के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष जीएम शाहीन ने कहा कि हमारे पास घाटी के विभिन्न हिस्सों से 840 पत्थरबाजों के बारे में जानकारी है जो जेलों में हैं. उन पर या तो नेशनल कॉन्फ्रेंस या पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान मामला दर्ज किया गया था.
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारें सांठगांठ में संलिप्त थीं और पैसे के लिए युवाओं को गिरफ्तार करती थीं, जिसके कारण उन्हें गृह मंत्रालय से मामलों की समीक्षा की मांग करनी पड़ी. शाहीन ने कहा कि हमने अपने लोगों को उनकी रिहाई का वादा किया है और पार्टी केंद्र के साथ इस पर सक्रिय रूप से काम कर रही है. हमने राजनीतिक कैदियों के लिए भी सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है.
घोषणापत्र में जनता दल (यूनाइटेड) ने जम्मू-कश्मीर को एक अग्रणी राज्य बनाने, उसके सभी निवासियों के लिए समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता भी जताई है. पार्टी ने कहा है कि हमारा घोषणापत्र जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं और आत्मसम्मान को बहाल करने के हमारे वादे को दर्शाता है.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के कुछ महीने बाद अपना रुख दिखाया है जिसमें उन्होंने कहा था कि आतंकवादियों के परिवार के किसी भी सदस्य या पत्थरबाजों के करीबी रिश्तेदारों को जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी.
इससे पहले मई में, पीटीआई के साथ एक इंटरव्यू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने न केवल आतंकवादियों को निशाना बनाया है, बल्कि आतंकी इको सिस्टम को भी नष्ट कर दिया है, जिससे देश भर में आतंकवादी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है. पीटीआई ने शाह के हवाले से कहा था कि अगर कोई पत्थरबाजी में शामिल होता है, तो उसके परिवार के सदस्यों को भी सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी.