एयर इंडिया की एक लंबी दूरी की फ्लाइट को उस समय वापस लौटना पड़ा, जब वह घंटों उड़ान भरने के बाद भी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सकी. दिल्ली से वैंकूवर जा रही यह फ्लाइट तकनीकी नहीं, बल्कि संचालन से जुड़ी एक बड़ी चूक के कारण वापस आई. पता चला कि जिस विमान ने उड़ान भरी थी उसे कनाडा में संचालन के लिए नियामक मंजूरी नहीं मिली थी. इस घटना ने एयरलाइन के आंतरिक सिस्टम और जांच प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
19 मार्च को उड़ान AI185 दिल्ली से रवाना हुई थी. इसके लिए Boeing 777-200LR का इस्तेमाल किया गया. करीब चार घंटे की उड़ान के बाद, जब विमान चीन के हवाई क्षेत्र में पहुंचा, तब यह सामने आया कि इस मॉडल को कनाडा के लिए मंजूरी नहीं मिली है. नियमों के मुताबिक, इस रूट पर केवल Boeing 777-300ER ही इस्तेमाल किया जा सकता है.
जैसे ही यह गलती सामने आई, विमान को तुरंत दिल्ली लौटने का निर्देश दिया गया. करीब नौ घंटे की कुल उड़ान के बाद यह सुरक्षित वापस पहुंच गया. यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि लंबी दूरी की उड़ान में ईंधन और समय दोनों का बड़ा नुकसान होता है. फिर भी यात्रियों की सुरक्षा और नियमों का पालन प्राथमिकता में रखा गया.
इस घटना से यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा. एयरलाइन ने उन्हें होटल में ठहरने और वैकल्पिक फ्लाइट की सुविधा दी. बाद में सभी यात्रियों को दूसरी उड़ान से वैंकूवर भेजा गया. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यात्रियों के अनुभव को प्रभावित किया और एयरलाइन की विश्वसनीयता पर भी असर डाला.
इस तरह की गलती अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बहुत कम देखने को मिलती है. अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई. एयर इंडिया ने इसे “ऑपरेशनल इश्यू” बताया है और कहा है कि सभी नियमों का पालन किया गया. साथ ही, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है. यह मामला अब एविएशन सेक्टर में चर्चा का विषय बन गया है.