कोर्ट ने रुकवाई थी सैलरी, डिप्टी कमिश्नर ने की जज को झूठे केस में फंसाने की कोशिश
जम्मू-कश्मीर में जज ने श्यामबीर पर झूठे मामले में उन्हें फंसाने के लिए प्रतिशोधात्मक जांच शुरू करने का आरोप लगाया है. 23 जुलाई के आदेश में कहा गया है कि अवमानना करने वाले डिप्टी कमिश्नर ने पीठासीन अधिकारी के खिलाफ जो कदम उठाने का फैसला किया था, इसका उद्देश्य पीठासीन अधिकारियों को किसी मनगढ़ंत घटना में फंसाना था.
जम्मू-कश्मीर के गंदेरबल में एक उप-न्यायाधीश ने जिले के डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की शुरुआती जांच में आरोप लगाया गया है कि उनके पहले के आदेश का पालन नहीं करने और न्यायाधीश को झूठे मामले में फंसाने से लेकर व्यक्तिगत छवि को खराब करने की कोशिश की गई. इस मामले को सब-जज ने जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव अतुल डुल्लू के सामने रखते हुए डिप्टी कमिश्नर श्यामवीर के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की है.
गंदेरबल जिला न्यायालय के उप-न्यायाधीश फैयाज अहमद कुरैशी ने डिप्टी कमिश्नर श्यामबीर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनके पिछले आदेश का बदला लेने के लिए उनके स्वामित्व वाली भूमि की जांच शुरू कर दी है. न्यायाधीश ने पूछा कि डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ क्यों न उन्हें आपराधिक अवमानना कार्यवाही के लिए जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में भेजा जाए.
कोर्ट ने रुकवाई थी सैलरी?
बता दें कि यह मुद्धा भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक मामले से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने कुरैशी की अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि सरकार ने उनसे भूमि अधिग्रहण करने के बाद उन्हें मुआवजा नहीं दिया, जबकि इस संबंध में 2022 में एक आदेश जारी किया गया था. इसी साल जनवरी में उप-न्यायाधीश ने एक आदेश पारित कर डिप्टी कमिश्नर को याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने का निर्देश दिया था, 21 जून के आदेश में जज ने कहा कि डीसी ने जनवरी के आदेश पर कार्रवाई नहीं की है और निर्देश दिया कि उनका और अन्य अधिकारियों का वेतन रोक दिया जाए.
डिप्टी कमिश्नर ने की जज को झूठे केस में फंसाने की कोशिश
इस बात पर 23 जुलाई को जारी नवीनतम आदेश में उप-न्यायाधीश कुरैशी ने कहा कि उनका पिछला आदेश गंदरबल के डिप्टी कमिश्नर श्री श्यामवीर को पसंद नहीं आया. उन्होंने पीठासीन अधिकारी पर व्यक्तिगत रूप से हमला करने का प्रयास किया, उन्हें बदनाम किया और उसमें हेरफेर और मनगढ़ंत बातों के माध्यम से उन्हें कमजोर किया . इसी उद्देश्य से उन्होंने तुरंत बाद एक बैठक बुलाई और जिले के कुछ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर अदालत के पीठासीन अधिकारी को निर्णय ऋणदाताओं के खिलाफ एक वैध आदेश पारित करने के लिए फंसाने की साजिश रची.