जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बुधवार को श्रीनगर की सड़कों पर एक साथ दो विरोध प्रदर्शनों ने नई गर्मी पैदा कर दी. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांगी, जबकि बीजेपी ने रोजगार और विकास के सवाल उठाए. पुलिस ने दोनों दलों के प्रस्तावित मार्च को आगे बढ़ने नहीं दिया.
राजबाग में नेशनल कॉन्फ्रेंस के मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता जुटे और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की. पार्टी की योजना जवाहर नगर स्थित बीजेपी कार्यालय तक मार्च निकालने की थी, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही प्रदर्शनकारियों को रोक दिया.
इसके बाद कार्यकर्ताओं ने राजबाग में धरना दिया और राज्य का दर्जा लौटाने के साथ संवैधानिक सुरक्षा की मांग दोहराई. कुछ देर के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस की स्थिति भी बनी. NC नेताओं ने केंद्र से सवाल किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की घोषित प्रतिबद्धता को पूरा करने में देरी क्यों हो रही है.
दूसरी ओर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हरि सिंह हाई स्ट्रीट पर प्रदर्शन किया. पार्टी की ओर से सिविल सचिवालय की तरफ मार्च करने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने इसे भी रोक दिया. बीजेपी ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर स्थानीय युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा नहीं करने का आरोप लगाया.
पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार को राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर बेरोजगारी, विकास और आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए. बीजेपी का दावा है कि सरकार ने जनता से किए कई वादे पूरे नहीं किए और शासन के स्तर पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं दे रहा.
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बीजेपी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया. पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई अहम फैसले अभी केंद्र के स्तर पर लंबित हैं और राज्य का दर्जा बहाल करना उनमें सबसे महत्वपूर्ण है. NC लगातार इस मुद्दे को राजनीतिक मंच पर उठा रही है, जबकि बीजेपी निर्वाचित सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े कर रही है.
इस तरह दोनों दलों की राजनीति का केंद्र अलग-अलग मुद्दे बनते जा रहे हैं. एक तरफ NC केंद्र से अधिकार और संवैधानिक आश्वासन मांग रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी स्थानीय शासन की जवाबदेही और रोजगार जैसे सवालों को प्रमुखता दे रही है.
श्रीनगर में दोनों प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी. प्रदर्शनकारियों को उनके तय स्थानों तक पहुंचने से रोकने के कारण दोनों मार्च बड़े राजनीतिक जुलूस में तब्दील नहीं हो सके. हालांकि, इन घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर में NC और बीजेपी के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को साफ तौर पर सामने ला दिया है.
खासकर कश्मीर घाटी में बीजेपी अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर अपना आधार मजबूत बनाए रखना चाहती है. आने वाले दिनों में रोजगार, विकास, शासन और राज्य के दर्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत हैं.