नई दिल्ली: कभी-कभी काम पूरा करने के लिए बच्चों जैसी लगन की जरूरत होती है और सोमवार के फेल हुए PSLV-C62 मिशन पर सवार 'यात्रियों' में से एक 'KID' ने ठीक वैसा ही दिखाया. जब यह सोचा गया कि मिशन के बाद PSLV का पूरा पेलोड, जिसमें जरूरी अन्वेषा सर्विलांस सैटेलाइट भी शामिल था वो खो गया है, तो स्पेनिश स्टार्टअप ऑर्बिटल पैराडाइम ने खुलासा किया कि उसका 'केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर', या KID, कैप्सूल न सिर्फ स्पेसक्राफ्ट से अलग होने में कामयाब रहा, बल्कि उसने डेटा भी भेजा.
KID के इस चमत्कारी कारनामे पर कंपनी का ध्यान गया. ऑर्बिटल पैराडाइम के हैंडल ने X पर पोस्ट किया, 'हमारा KID कैप्सूल, सभी मुश्किलों के बावजूद, PSLV C62 से अलग हो गया, चालू हुआ, और डेटा भेजा. हम ट्रैजेक्टरी को फिर से बना रहे हैं. पूरी रिपोर्ट आएगी'. अपनी वेबसाइट पर, कंपनी कहती है कि वह 'अंतरिक्ष औद्योगीकरण' को सक्षम बनाने के लिए काम करती है और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, ऑर्बिट से पृथ्वी तक बार-बार, कुशल और सुलभ उड़ानें प्रदान करना चाहती है.
Our KID capsule, against all odds, separated from PSLV C62, switched on, and transmitted data. We're reconstructing trajectory. Full report will come. [Edited from previous version]
— Orbital Paradigm (@OrbitalParadigm) January 13, 2026
इसमें ऐसे कैप्सूल डिजाइन करना शामिल है जो री-एंट्री के उच्च तापमान को झेल सकें और यह सुनिश्चित करना कि अंतरिक्ष से पृथ्वी तक ऐसी कार्गो यात्राएं अपेक्षाकृत कम लागत वाली हों. KID एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर और कंपनी के प्रस्तावित वाहन, 'कर्नेल' का एक प्रोटोटाइप था, जिसका मकसद ऑर्बिट से 120 किलोग्राम तक का पेलोड पृथ्वी पर वापस लाना है.
ऑर्बिटल पैराडाइम के को-फाउंडर और CEO फ्रांसेस्को कैसियाटोर ने मिशन से पहले लिखा था कि KID को अंतरिक्ष में भेजने के पीछे का विचार कंपनी को वायुमंडलीय री-एंट्री में माहिर बनने की अपनी खोज में आगे बढ़ाना था. उन्होंने लिखा, अन्य मिशन चरणों के विपरीत, री-एंट्री के दौरान आने वाली सभी स्थितियों को एक ही समय में जमीन पर सटीक रूप से दोहराने का कोई तरीका नहीं है'.
KID के साथ, पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) 15 सैटेलाइट ले जा रहा था, जिसमें EOS-N1 पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट और अन्वेषा नामक सर्विलांस सैटेलाइट शामिल था, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया था. अन्वेषा की इमेजिंग क्षमताओं का मकसद डिफेंस सेक्टर में मदद करना था, जिससे भारत दुश्मन की गतिविधियों और हलचल का पता लगा सके.
पेलोड में एक डेडिकेटेड टैंकर सैटेलाइट, आयुलसैट, और ध्रुव स्पेस के साथ-साथ स्टूडेंट्स द्वारा बनाए गए कुछ सैटेलाइट भी शामिल थे.
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के 2026 के पहले मिशन के तहत लॉन्च किया गया PSLV-C62, आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 10.18 बजे रवाना हुआ. स्पेस एजेंसी ने बताया कि पहले दो स्टेज ने उम्मीद के मुताबिक काम किया, लेकिन तीसरे स्टेज में चीजें खराब होने लगीं.
ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा, 'जब स्ट्रैप-ऑन मोटर फ्लाइट के तीसरे स्टेज के दौरान यान को तय ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए थ्रस्ट दे रहे थे, तब रॉकेट में गड़बड़ी और बाद में फ्लाइट पाथ से भटकाव देखा गया'.