नई दिल्ली: दक्षिण कश्मीर में चल रही एक हाई-प्रोफाइल क्राउड-फंडिंग गतिविधि अब जांच एजेंसियों के दायरे में आ गई है. जम्मू-कश्मीर की खुफिया इकाइयों और स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने एक बड़े डोनेशन नेटवर्क को लेकर चेतावनी जारी की है.
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ईरान के लिए मानवीय सहायता के नाम पर घाटी में बड़े स्तर पर धन और कीमती सामान इकट्ठा किया गया है, जिसकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
जांच एजेंसियों के अनुसार, करीब 17.91 करोड़ रुपए नकदी के साथ-साथ सोना और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी जुटाई गई हैं. हालांकि, यह रकम और सामान फिलहाल कहां है, इसका स्पष्ट पता नहीं चल सका है. अधिकारियों को आशंका है कि इस धन का कुछ हिस्सा गैरकानूनी गतिविधियों, यहां तक कि आतंकी फंडिंग में भी इस्तेमाल हो सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी दूतावास की ओर से 14 मार्च को जारी एक वास्तविक सहायता अपील को कुछ बिचौलियों ने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया. यह नेटवर्क भावनात्मक और धार्मिक अपीलों के जरिए लोगों से चंदा इकट्ठा कर रहा था. खासतौर पर शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर उनसे नकद और आभूषण तक लिए गए.
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गतिविधि घाटी के कई जिलों में फैली हुई थी. बडगाम, बारामूला और श्रीनगर जैसे इलाकों से करोड़ों रुपए जुटाए जाने के संकेत मिले हैं, जबकि अन्य जिलों से भी उल्लेखनीय संग्रह की जानकारी सामने आई है. कई मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों ने भी अपनी बचत और कीमती सामान दान कर दिया.
इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कुछ ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिनके कथित तौर पर विदेशी संगठनों और स्थानीय अलगाववादी तत्वों से संबंध बताए जा रहे हैं. जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के जरिए जुटाई गई राशि का कुछ हिस्सा वापस कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
यह मामला अब SIA के अलावा नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भी रडार पर है. सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों पर नजर रखी जा रही है. और साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी संस्था या व्यक्ति को दान देने से पहले उसकी साख और पहचान की पूरी जांच करें, ताकि वे किसी धोखाधड़ी का शिकार न बने.