मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि यह समुद्री रास्ता अब अमेरिका, इजरायल और यूरोप के जहाजों के लिए बंद कर दिया गया है.
ईरान के सरकारी प्रसारक के जरिए जारी बयान में कहा गया कि युद्ध की स्थिति में किसी भी देश को अपने समुद्री मार्गों को नियंत्रित करने का अधिकार होता है. इसी अधिकार के तहत ईरान ने फैसला लिया है कि पश्चिमी देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
आईआरजीसी ने अपने बयान में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका, इजरायल, यूरोप या उनके सहयोगी देशों के जहाज इस जलमार्ग में दिखाई दिए तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की जा रही है. पिछले कुछ दिनों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण कई जहाजों ने इस मार्ग से गुजरना बंद कर दिया है.
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने कहा है कि वह चीन के झंडे वाले जहाजों को इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देगा. ईरान का कहना है कि यह फैसला चीन के समर्थन और उसके रुख के प्रति आभार के तौर पर लिया गया है. इस फैसले से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.
वैसे तो ईरान ने साफ तौर पर भारत का नाम नहीं लिया है लेकिन उसके फैसले से साफ संकेत मिलता है कि भारत के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है. अनुमान है कि दुनिया में समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों के मुताबिक इस समय कई तेल टैंकर और मालवाहक जहाज खाड़ी क्षेत्र के पास ही रुके हुए हैं. कुछ जहाज कुवैत और दुबई के पास समुद्र में इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर खड़े हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है.