menu-icon
India Daily

6000 टन वजन, परमाणु शक्ति संपन्न, समंदर में उतरने के लिए तैयार INS अरिघात, चीन-पाकिस्तान की उड़ेगी नींद!

आईएनएस अरिघात पनडुब्बी का वजन 6,000 टन से अधिक है. यह नौसैनिक पोत में 9.5 मीटर का ड्राफ्ट और 11 मीटर की चौड़ाई है. पानी के अंदर अरिघात 24 नॉटिकल मील प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलता है, जबकि सतह पर यह 10 नॉट की गति से तैर सकता है. खबरों के मुताबिक पहले दो एसएसएन बनाने में कम से कम एक दशक लगेगा, जो लगभग 95% स्वदेशी होंगे, जबकि अगले चार को दूसरे चरण में मंजूरी दी जाएगी.   

India Daily Live
6000 टन वजन, परमाणु शक्ति संपन्न, समंदर में उतरने के लिए तैयार INS अरिघात, चीन-पाकिस्तान की उड़ेगी नींद!
Courtesy: Social Media

भारत एक बार फिर अपनी दूसरी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी को परमाणु मिसाइलों से लैस करने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह सुरक्षा और नियंत्रण के सिद्धांतों के लिए है. पारंपरिक हथियारों से लैस दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां गरजने के लिए तैयार हैं. हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के तेजी से बढ़ते नौसैनिक प्रभाव को कम करने के लिए भारत युद्धस्तर पर इन्हें मंजूरी देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. विजाग के जहाज निर्माण केंद्र में निर्मित 6,000 टन के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें लंबे समय तक अपग्रेड के साथ कुछ तकनीकी मुद्दों को देखा जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक एसएसबीएन परमाणु-चलित बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ परमाणु चालित पनडुब्बी एक या दो महीने के भीतर चालू हो जाएगी. इसके बाद उसे आईएनएस अरिहंत से जुड़ जाएगी, जो साल 2018 में पूरी तरह से चालू हो गई थी.

समंदर में उतरने के लिए तैयार INS अरिघात

इसमें शुरुआती मामला एसबीसी में 'प्रोजेक्ट-77' के तहत छह ऐसी 6,000 टन की 'हंटर-किलर' पनडुब्बियों के लिए था लेकिन पहले इसे घटाकर तीन कर दिया गया और अब यह संख्या दो हो गई है. खबरों के मुताबिक दो एसएसएन बनाने में कम से कम एक दशक लगेगा, जो लगभग 95% स्वदेशी होंगे, जबकि अगले चार को दूसरे चरण में मंजूरी दी जाएगी.   

क्या है INS अरिघात?

INS अरिघात बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी का वजन 6,000 टन से अधिक है और इसकी लंबाई 111.6 मीटर है. इसके अलावा, इस नौसैनिक पोत में 9.5 मीटर का ड्राफ्ट और 11 मीटर की चौड़ाई है. पानी के अंदर अरिघात 24 नॉटिकल मील प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलता है, जबकि सतह पर यह 10 नॉट की गति से तैर सकता है.

कितना जरूरी है INS अरिघात?

यह पनडुब्बी देश के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे दुश्मन के टारगेट को नष्ट करने के लिए लंबे समय तक पानी में रहते हुए लंबी दूरी तक उच्च गति पर चुपके से काम कर सकता है. डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बी के विपरित जिन्हें अपनी बैटरी को रिचार्ज करने के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए बीच-बीच में सतह पर आना या स्नोर्कल कर सकता है. 

चीन-पाकिस्तान की उड़ेगी नींद!

बता दें कि भारत को चीन और पाकिस्तान से दोहरे खतरे से निपटने के लिए कम से कम 18 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों, चार एसएसबीएन और छह एसएसएन की जरूरत है, जो भूमि सीमाओं के बाद समुद्री क्षेत्र में भी सांठगांठ कर सके.