मिडल ईस्ट में यु्द्द का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है. देश का एविएशन सेक्टर बंद होने की कगार पर पहुंच गया है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर तुरंत हस्ताक्षेप की मांग की है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय को बताते हुए उन्होंने कहा कि आसमान छूती एविएशन टर्बाइन फ्यूल के कारण एयरलाइन इंडस्ट्री पूरी तरह ठप पड़ने वाली है.
मौजूदा युद्ध के चलते दुनिया के 20 फीसदी तेल सप्लाई वाले सबसे अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट आ गई है. इसका नतीजा यह है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर से उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. FIA के मुताबिक, इस संकट के कारण ATF की कीमतों में 295% का भारी उछाल आया है. इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये के अपने सबसे निचले स्तर पर गिरने से एयरलाइंस का वित्तीय बोझ और ज्यादा बढ़ गया है.
FIA ने सरकार को बताया कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में हाल ही में 73 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है. किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च में फ्यूल की लागत 30 से 40 प्रतिशत होती है, जो अब बढ़कर 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके चलते अप्रैल 2026 में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों ही उड़ानें संचालित करना एयरलाइंस के लिए पूरी तरह से घाटे का सौदा बन गया है.
इस अभूतपूर्व संकट से उबरने और ग्लोबल मार्केट में टिके रहने के लिए एयरलाइन संस्था ने सरकार से तीन बड़े कदम उठाने की अपील की है:
1. क्रैक बैंड की वापसी: कच्चे तेल को रिफाइन कर ईंधन बनाने पर होने वाले मुनाफे को संतुलित करने के लिए पूर्व-निर्धारित क्रैक बैंड फॉर्मूले को फिर से लागू किया जाए.
2. एक्साइज ड्यूटी में छूट: घरेलू उड़ानों पर लगने वाली 11 प्रतिशत की एक्साइज ड्यूटी को फौरी राहत के तौर पर कुछ समय के लिए टाल दिया जाए.
3. राज्यों में VAT में कटौती: एयरलाइंस के 50% से अधिक ऑपरेशन दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और कोलकाता जैसे शहरों से होते हैं, लेकिन यहां वैट (VAT) 16 से 20 प्रतिशत के बीच है. मुख्य राज्यों में इसे कम किया जाए.