भारत अपनी तीसरी न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) को अगले छह महीनों में चालू करने की योजना बना रहा है, ताकि समंदर में अपनी ताकत को औऱ मजबूत किया जा सके. तीसरी SSBN यानी INS अरिदमन टेस्टिंग के दौर से गुजर रही है. ये सबमरीन पहले दो (INS अरिहंत और INS अरिघट) से थोड़ी बड़ी है, जिससे अधिक लंबी दूरी की मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है. तीसरी SSBN 7000 टन वजनी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 90,000 करोड़ रुपए की उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (Advanced Technology Vessel) प्रोजेक्ट के तहत चौथी SSBN का भी निर्माण किया जा रहा है.
एक अधिकारी के मुताबिक, न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली तीसरी सबमरीन INS अरिदमन और चौथा निर्माणाधीन SSBN और भी अधिक शक्तिशाली होगा. 7,000 टन वजनी और 125 मीटर लंबी होने के कारण, तीसरी और चौथी सबमरीन बड़ी संख्या में K-4 मिसाइलों को ले जाने में सक्षम होंगी.
1990 के दशक में 90,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से शुरू की गई वर्गीकृत उन्नत प्रौद्योगिकी पोत परियोजना (Classified Advanced Technology Vessel Project) के तहत निर्मित चार पनडुब्बियां, निश्चित रूप से अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के SSBN के आधे से भी कम आकार की हैं.
चीन के पास छह जिन-क्लास एसएसबीएन हैं, जिनमें 10,000 किलोमीटर की रेंज वाली जेएल-3 मिसाइलें हैं, इसके अलावा छह परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां (जिन्हें एसएसएन कहा जाता है, जिसका मतलब पारंपरिक युद्ध है) हैं. वहीं, अमेरिका के पास 14 ओहियो-क्लास एसएसबीएन और 53 एसएसएन हैं.
भारत भी अब 13,500 टन के एसएसबीएन बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जिसमें 190 मेगावाट के बहुत अधिक शक्तिशाली रिएक्टर होंगे. TOI की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो 6,000 टन के 'हंटर-किलर' एसएसएन को स्वदेशी रूप से बनाने की 40,000 करोड़ रुपये की परियोजना अंतिम मंजूरी के लिए पीएम के नेतृत्व वाली सुरक्षा पर कैबिनेट समिति के पास है.
इससे पहले, गुरुवार को विशाखापत्तनम में INS अरिघट के रूप में दूसरी सबमरीन को इंडियन नेवी में शामिल कर लिया गया. INS अरिघाट का डिस्प्लेसमेंट 6000 टन है और इसके 'हंप' पर वर्टिकल मिसाइल लॉन्च के लिए चार साइलो हैं. इसका कमीशन विजाग में किया गया. इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और DRDO प्रमुख समीर कामत मौजूद थे.
राजनाथ सिंह ने कहा कि आईएनएस अरिघाट भारत की परमाणु तिकड़ी को और मजबूत करेगा, परमाणु शक्ति को बढ़ाएगा और देश की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाएगा. पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की राजनीतिक इच्छाशक्ति को याद करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारे लिए हर क्षेत्र में तेजी से विकास करना जरूरी है, जिसमें रक्षा भी शामिल है. आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ हमें एक मजबूत सेना की भी जरूरत है. हमारी सरकार ये सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है कि हमारे सैनिकों के पास हाई क्वालिटी वाले हथियार और प्लेटफॉर्म हों.
एक अधिकारी ने कहा कि INS अरिहंत और INS अरिघट मिलकर देश के दुश्मनों को रोकने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की भारत की क्षमता को बढ़ाएंगे. INS अरिघट, INS अरिहंत के मुकाबले बहुत अधिक एडवांस है.