भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष की गई कुर्सी, अविश्वास प्रस्ताव में मिली हार, UDF को बड़ा झटका

भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष दीया बिनू अविश्वास प्रस्ताव हार गईं. कांग्रेस में बगावत और सहयोगी दलों की नाराजगी से UDF की पाला नगरपालिका में छह महीने पुरानी सत्ता समाप्त हो गई.

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Sagar Bhardwaj

केरल की पाला नगरपालिका में भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष मानी जाने वाली 21 वर्षीय दीया बिनू को मंगलवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा. अविश्वास प्रस्ताव में हार के बाद उन्हें अपने पद से हटना पड़ा. 26 सदस्यीय नगर परिषद में प्रस्ताव के पक्ष में 17 मत पड़े, जबकि इसे पारित कराने के लिए 14 वोटों की आवश्यकता थी. इस परिणाम के साथ ही पाला नगरपालिका में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की लगभग छह महीने पुरानी सत्ता का अंत हो गया और स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई.

कांग्रेस में बगावत बनी हार की सबसे बड़ी वजह

दीया बिनू के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने पेश किया था, लेकिन निर्णायक भूमिका कांग्रेस के बागी पार्षदों ने निभाई. चार कांग्रेस पार्षदों ने पार्टी लाइन से हटकर प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. उपाध्यक्ष माया राहुल ने भी अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया. वहीं, जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी व्हिप के बावजूद दो कांग्रेस पार्षद मतदान से दूर रहे. इसके अलावा केरल कांग्रेस के तीन और केरल डेमोक्रेटिक पार्टी के एक पार्षद ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया. इन घटनाओं ने UDF के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया.

दीया बिनू बोलीं- मेरे खिलाफ कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं

पद से हटने के बाद दीया बिनू ने लोकतांत्रिक फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार करने की बात कही. उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन उसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग, रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद, सरकारी आदेशों के उल्लंघन या किसी भी गैरकानूनी कार्य का कोई ठोस आरोप नहीं लगाया गया. उनका कहना था कि प्रस्ताव लाने और उसका समर्थन करने वाले सदस्य उनके खिलाफ कोई तथ्यात्मक आरोप साबित नहीं कर सके.


कैसे बनी थीं भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष

नगर निकाय चुनाव के बाद दीया बिनू के नेतृत्व वाले तीन सदस्यीय निर्दलीय समूह को UDF का समर्थन मिला था, जिसके बाद वह पाला नगरपालिका की अध्यक्ष बनीं. इसी के साथ वह भारत की सबसे युवा नगराध्यक्ष के रूप में चर्चा में आई थीं. अर्थशास्त्र में स्नातक दीया बिनू उस समय उच्च शिक्षा की तैयारी भी कर रही थीं. उनके पिता बिनू पुलिक्कंदम और चाचा बीजू भी चुनाव जीतकर नगर परिषद पहुंचे थे, जिससे तीन सदस्यीय निर्दलीय समूह का गठन संभव हुआ. हालांकि अब अविश्वास प्रस्ताव के बाद उनकी राजनीतिक पारी को बड़ा झटका लगा है, जिसे केरल की स्थानीय राजनीति में UDF के लिए महत्वपूर्ण नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है.