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'भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अबकी बार ट्रंप से हार का सबूत', जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर जोरदार हमला

उन्होंने चेतावनी दी कि इस व्यापार समझौते से जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के सोयाबीन, मक्का, फल, मेवे और कपास उगाने वाले किसान प्रभावित होंगे.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अबकी बार ट्रंप से हार का सबूत', जयराम रमेश का केंद्र सरकार पर जोरदार हमला
Courtesy: pinterest

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है.  रविवार को उन्होंने कहा कि यह डील 'अबकी बार ट्रंप से हार' का प्रतिबिंब है और इसे ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में रद्द किये गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बाद पैदा हुई भ्रम की स्थिति के बीच उनका यह बयान आया है.

उन्होंने यह तर्क देते हुए कि भारत ने पर्याप्त लाभ प्राप्त किए बिना ही रियायतें दे दी हैं, कहा कि इस व्यापार सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत होनी चाहिए और आयात उदारीकरण विशेष रूप से कृषि उत्पादों के आयात उदारीकरण से संबंधित खंड को रद्द किया जाना चाहिए

यह अबकी बार ट्रंप से हार का सबूत

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में 'ह्यूस्टन में अबकी बार ट्रंप सरकार' का नारा दिया था लेकिन अंतरिम समझौते का यह ढांचा 'अबकी बार ट्रंप से हार' का सबूत है.

जयराम रमेश ने कहा कि इस समझौते में दोनों पक्षों को बदलाव होने पर अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन करने की अनुमति है और ऐसे में जब ट्रंप के टैरिफ में बदलाव हुआ है, भारत को भी अपने दायित्वों पर पुनर्विचार करने का अधिकार है. उन्होंने कहा, 'हमारी पहली प्रतिबद्धता खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ कम करने या समाप्त करने की है. पीएम से हमारी मांग है कि फिलहाल इस पर रोक लगा दी जाए.'

उन्होंने कहा कि भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर आयात शुल्क समाप्त करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई थी, इस प्रावधान को संयुक्त बयान के तहत बदला जाना चाहिए.

इस डील से प्रभावित होंगे भारत के किसान

उन्होंने चेतावनी दी कि इस व्यापार समझौते से जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के सोयाबीन, मक्का, फल, मेवे और कपास उगाने वाले किसान नकारात्मक तौर पर प्रभावित होंगे.

जल्दबाजी में क्यों किया समझौता

रमेश ने कहा कि हमारा दूसरा सवाल प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से है. उन्हें दिसंबर से ही पता था कि टैरिफ को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट फैसला कभी भी आ सकता है और कई लोगों का मानना था कि यह फैसला ट्रंप के खिलाफ जा सकता है तो आपने इतनी जल्दबादी में समझौता क्यों किया.

कांग्रेस नेता ने कहा कि हमें शर्तों पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि यह सौदा एकतरफा है और इससे भारत के लाखों किसानों को नुकसान होगा. रमेश ने कहा कि हम इस समझौते के संभावित परिणामों को लेकर कई राज्यों के किसानों के साथ 'महा किसान महा चौपाल' का आयोजन करेंगे.