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India Daily

20 साल बाद थिएटर कमांड पर निर्णायक फैसला! एक कमान के तहत आएंगी तीनों सेनाएं, कितनी बढ़ेगी भारत की ताकत?

भारत में थिएटर कमांड लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है. नई व्यवस्था के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना एकीकृत कमान के तहत काम करेंगी. इससे युद्ध क्षमता, समन्वय और त्वरित फैसले लेने की ताकत बढ़ेगी.

KanhaiyaaZee
20 साल बाद थिएटर कमांड पर निर्णायक फैसला! एक कमान के तहत आएंगी तीनों सेनाएं, कितनी बढ़ेगी भारत की ताकत?
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों में लंबे समय से जिस बड़े सैन्य सुधार की चर्चा हो रही थी, वह अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. सरकार तीनों सेनाओं को एकीकृत कमान के तहत लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं. जल्द ही थिएटर कमांड का विस्तृत प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा जा सकता है. इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा रक्षा सुधार माना जा रहा है.

थिएटर कमांड ऐसी व्यवस्था है, जिसमें सेना, नौसेना और वायुसेना अलग-अलग काम करने के बजाय एक साझा कमांडर के नेतृत्व में अभियान चलाएंगी. प्रस्तावित योजना के तहत तीन प्रमुख कमांड बनाई जाएंगी. पहली उत्तरी सीमा पर चीन से जुड़े मोर्चे के लिए, दूसरी पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के लिए और तीसरी समुद्री सुरक्षा के लिए होगी. प्रत्येक कमांड का नेतृत्व चार सितारा अधिकारी करेगा.

युद्ध के दौरान क्या होगा फायदा?

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करना है. अभी अलग-अलग कमांड के कारण कई फैसलों में समय लगता है. थिएटर कमांड लागू होने के बाद जमीन, समुद्र और आसमान में एक साथ कार्रवाई करना आसान होगा. इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और युद्ध जैसी परिस्थितियों में तेजी से फैसले लिए जा सकेंगे.

क्यों आसान नहीं है यह बदलाव?

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पूरी सैन्य व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन होगा. तीनों सेनाओं के अपने नियम, कार्यप्रणाली और संसाधन हैं. कमान, बजट और जिम्मेदारियों के बंटवारे जैसे कई मुद्दों पर अभी भी विचार चल रहा है. इन्हीं पहलुओं को अंतिम रूप देने के बाद योजना को लागू किया जाएगा.

दो दशक पुरानी तैयारी

कारगिल युद्ध के बाद पहली बार संयुक्त सैन्य कमान की जरूरत महसूस की गई थी. वर्ष 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनाकर इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया. अब जनरल एनएस राजा सुब्रमणि इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. सरकार इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों और आत्मनिर्भर रक्षा नीति के अनुरूप मान रही है.

अब फैसले पर टिकी हैं उम्मीदें

अगर केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति इस योजना को मंजूरी देती है, तो भारत अमेरिका और चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां एकीकृत सैन्य कमान की व्यवस्था पहले से लागू है. हालांकि इसे पूरी तरह लागू होने में कुछ वर्ष लग सकते हैं. फिलहाल रक्षा मंत्रालय अंतिम मसौदे पर विचार कर रहा है और आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.