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वजन घटाने वाली दवाओं पर सरकार ने कसा शिकंजा, क्लिनिक से फार्मेसी तक छापे; सख्त निर्देश जारी

भारत के ड्रग कंट्रोलर ने ओजेंपिक और मौनज़ारो जैसी GLP-1 वजन घटाने वाली दवाओं की अनधिकृत बिक्री और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. बिना विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के इनका उपयोग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.

Grok
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ड्रग कंट्रोलर ने GLP-1 आधारित वजन घटाने वाली दवाओं की अवैध बिक्री पर शिकंजा कसा है. बाजार में ओजेंपिक और मौनजारो के जेनेरिक विकल्पों की बाढ़ आने के बाद भ्रामक प्रचार और बिना प्रिस्क्रिप्शन वितरण के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बिना चिकित्सीय देखरेख के इन दवाओं का सेवन गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है. अब इन दवाओं की बिक्री केवल विशेषज्ञों की सलाह पर ही संभव होगी.

बाजार में GLP-1 आधारित दवाओं के कई जेनेरिक संस्करणों के आने से इनकी उपलब्धता अचानक बढ़ गई है. ओजेंपिक और मौनजारो जैसी दवाओं के बढ़ते वैश्विक विवादों के बीच भारतीय ड्रग कंट्रोलर ने बिना अनुमति बिक्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अधिकारियों का मानना है कि जेनेरिक दवाओं की आड़ में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है. यह कदम आम लोगों को दवाओं के गलत उपयोग से बचाने के लिए उठाया गया है ताकि स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों का सख्ती से पालन हो सके.

बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर जताई चिंता 

स्वास्थ्य अधिकारियों को मुख्य चिंता इस बात की है कि ये दवाएं बिना किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की प्रिस्क्रिप्शन के धड़ल्ले से बेची जा रही हैं. लोग अपनी मांग के आधार पर सीधे रिटेल फार्मेसी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, थोक विक्रेताओं और यहां तक कि वेलनेस क्लीनिकों से ये दवाएं हासिल कर रहे हैं. बिना डॉक्टरी जांच और रिपोर्ट के इन दवाओं का सेवन सेहत के लिए जानलेवा हो सकता है. इसलिए प्रशासन ने इन सभी माध्यमों पर निगरानी बढ़ाने और अवैध सप्लाई को रोकने का कड़ा निर्देश दिया है.

10 मार्च की विस्तृत एडवाइजरी के कड़े नियम 

ड्रग कंट्रोलर ने 10 मार्च को दवा निर्माताओं के लिए एक विशेष और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. इसके तहत उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर अब पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. अब दवा निर्माता किसी भी प्रकार के सरोगेट विज्ञापन या अप्रत्यक्ष प्रचार के जरिए इन दवाओं के 'ऑफ लेबल' उपयोग को बढ़ावा नहीं दे पाएंगे. इस एडवाइजरी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवा कंपनियां नैतिक तरीकों से अपनी सप्लाई चेन का संचालन करें और उपभोक्ताओं को केवल प्रमाणित जानकारी दें.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करते हुए नियामक निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया है. मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि बिना किसी उचित चिकित्सीय देखरेख के इन दवाओं का उपयोग शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न कर सकता है. मंत्रालय के इस आदेश के बाद अब सप्लाई चेन की हर कड़ी पर बारीक नजर रखी जा रही है ताकि दवाओं का वितरण केवल प्रमाणित और नैतिक रास्तों से ही संभव हो सके और जनता पूरी तरह सुरक्षित रहे.