अब और खतरनाक बनेगा सुखोई, भारत-रूस बनाएंगे विध्वंसक जेट, कांपेंगे दुश्मन!

भारत और रूस का मिशन ब्रह्मोस बेहद सफल रहा है. दोनों देशों के इस संयुक्त मिशन की वजह से इसे तीसरे देशों को बेचा जाने लगा. अब भारत और रूस, एक और फाइटर जेट बनाने साथ उतरे हैं. ये फाइटर जेट, हिंदुस्तान की शान रहे हैं, अब इन्हें और एडवांस किया जाएगा और मित्र देशों को बेचा जाएगा. आइए जानते हैं क्या नया होने वाला है.

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हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 272 सुखोई MKI भारतीय वायुसेना को सौंप दी है. ये खतरनाक फाइटर जेट दशकों से हिंदुस्तानी वायुसेना की शान रहा है. हर मोर्चे पर इस एयरक्राफ्ट ने खुद को साबित किया है. 222 सुखोई 30, भारत में ही बने हैं. नाशिक प्लांट में रूस ने हमें टोक्नोलॉजी दी, जिसके बाद इन्हें तैयार किया गया. 272 सुखोई में से 40 जेट ऐसे हैं, जिन्हें मॉडिफाई किया जा रहा है. इन्हें सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के लिए अपग्रेड किया जाएगा. 

तंजुवर एयर बेस पर वायुसेना ने पहले ही ब्रह्मोस से लैस मिसाइलें तैनात कर दी हैं. इन्हें टाइगर शार्क कानाम दिया गया है. तमिलनाडु में ये स्क्वार्डन 2020 से ही तैनात हैं. हिंद महासागर क्षेत्र इनकी रेंज में है.
वायुसेना ने 12 सुखोई एयक्राफ्ट अब तक खो दिया है. इन्हें बढ़ाने की दिशा में भी काम चल रहा है. देश में फाइटर जेट्स की कमी पड़ रही थी, जिसके बाद ये कदम क्रांतिकारी साबित हो सकता है. 

वायुसेना का सैन्य क्षमता बढ़ाने पर जोर

वायुसेना ने 31 फाइट स्कावर्डन तैयार किए हैं. सुखोई 30MKI एक मल्टीरोल, फाइटर जेट है. भारत में इसके कई वर्जन हैं. चीन, एल्जीरिया, इंडोनेसिया, यूगांडा से लेकर वियतनाम तक, ये एयक्राफ्ट मौजूद हैं. भारत अपने मौजूदा संसाधनों के भीतर ही इसका उत्पादन करेगा और रक्षा आयात को गति देगा. 

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर होगी बातचीत

HAL और ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) सुखोई के बीच बातचीत चल रही है कि इन्हें बनाया जाएगा और बेचा जाएगा. रूस ने प्रोडक्शन में मदद करने का ऐलान किया है. दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी बात होगी. नाशिक का ओवरहालिंग डिविजन, MiG सिरीज के फाइटर जेट्स को भी अपग्रेड कर रहा है.  

सुखोई को अपग्रेड करने पर हो रहा है काम

सुखोई को अपग्रेड किया जा रहा है. इस एयक्राफ्ट में ब्रह्मोस को फिट किया जाएगा, जिससे आसमान से जमीन तक पर सीधा हमला किया जा सकेगा. सुखोई को अपग्रेड करने पर सरकार का पूरा जोर है. यह भारत के रक्षा क्षेत्र को मजबूदी देगा. भारत रूस के डिफेंस इंडस्ट्री के साथ और करार कर सकता है.  रक्षा क्षेत्र में रूस, भारत का अहम रणनीतिक भागीदार रहा है. सुखोई में कई मिसाइलों को कैरी किया जा सकता है. R73/77 से लेकर ब्रह्मोस और अस्त्र तक जैसी मिसाइलें इसकी ताकत बढ़ाने वाली हैं.