'भारत-यूरोप दिखा रहे हैं सहयोग का नया मॉडल', दिल्ली पहुंची EU प्रमुख ने चीन-US को दिखाया आइना
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-यूरोप साझेदारी को वैश्विक सहयोग का नया मॉडल बताया. दिल्ली यात्रा के दौरान उन्होंने व्यापार, रणनीति और साझा मूल्यों पर रिश्ते मजबूत करने पर जोर दिया.
नई दिल्ली: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत और यूरोपीय संघ को एक ऐसे रणनीतिक साझेदार के रूप में पेश किया है, जो विभाजित और अनिश्चित वैश्विक माहौल में सहयोग का वैकल्पिक रास्ता दिखा सकता है. चार दिवसीय भारत यात्रा पर आईं वॉन डेर लेयेन ने कहा कि संवाद, खुलेपन और आपसी भरोसे पर आधारित भारत-ईयू संबंध दुनिया को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं.
नई दिल्ली पहुंचने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संदेश में वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोप ने रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन को चुना है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि दोनों पक्ष अपनी पूरक क्षमताओं का उपयोग कर आपसी मजबूती बना रहे हैं और एक खंडित दुनिया को दिखा रहे हैं कि सहयोग का दूसरा रास्ता भी संभव है.
इंडिया-ईयू शिखर सम्मेलन पर नजरें
वॉन डेर लेयेन की यह यात्रा इस सप्ताह होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है. इसे नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण की शुरुआत बताया है.
गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि की भूमिका
यात्रा के दौरान वॉन डेर लेयेन यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के साथ गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी. यह प्रतीकात्मक कदम भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है. केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उनके आगमन पर स्वागत किया, जबकि विदेश मंत्रालय ने साझा मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं को रिश्तों की नींव बताया.
मुक्त व्यापार समझौते पर केंद्रित चर्चा
इस दौरे का प्रमुख एजेंडा भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता है, जो लंबे समय से लंबित है. वॉन डेर लेयेन पहले इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कह चुकी हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते से करीब 2 अरब लोगों का बाजार जुड़ेगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से को प्रभावित करेगा. इससे कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग और आईटी क्षेत्र को लाभ मिल सकता है.
तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियां
व्यापार के अलावा बातचीत में तकनीक, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल ढांचा और सुरक्षा सहयोग शामिल हैं. दोनों पक्ष आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और सीमित बाजारों पर निर्भरता घटाने पर सहमत दिख रहे हैं. सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है, ताकि वैश्विक अस्थिरता के बीच साझेदारी को स्थायी बनाया जा सके.
बढ़ता व्यापार और भविष्य की उम्मीद
भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर का है. अधिकारी मानते हैं कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता और रणनीतिक तालमेल आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को काफी आगे ले जा सकता है. वैश्विक तनाव और संरक्षणवाद के दौर में भारत-ईयू रिश्तों को स्थिरता और संतुलन की ताकत के रूप में देखा जा रहा है.