भारत ने निकाला होर्मुज स्ट्रेट का तोड़, जानें अब किस रास्ते से आ रहा है कच्चे तेल का खजाना

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित हो रही है. भारत अब खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता कम करते हुए अंगोला और पश्चिम अफ्रीका से कच्चा तेल आयात कर रहा है. एचपीसीएल ने इसी कड़ी में बड़ी खरीदारी की है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को हिलाकर रख दिया है. खाड़ी देशों से एशिया और यूरोप जाने वाली तेल-गैस की आपूर्ति बाधित होने से कीमतों में उछाल आया है. इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. देश अब मध्य पूर्व पर निर्भरता घटाकर अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नए बाजारों से तेल खरीद रहा है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अंगोला से 20 लाख बैरल तेल खरीदा है. यह खरीद टेंडर के जरिए की गई. मध्य पूर्व से तेल महंगा होने और उसकी उपलब्धता घटने के कारण भारतीय रिफाइनर अब पश्चिम अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं. यह बदलाव भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव दिखाता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आपूर्ति पर संकट

भारत पहले मध्य पूर्व पर तेल आयात के लिए 45 फीसदी निर्भर था. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता प्रभावित हुआ है. इस समुद्री मार्ग से ही खाड़ी देशों का तेल दुनिया भर में जाता है. इस रास्ते के बाधित होने से भारत में एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति सबसे अधिक प्रभावित हुई है.

तेल की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी

शुक्रवार को ओमान और दुबई के बेंचमार्क में थोड़ी नरमी जरूर आई, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में हालात बेहद गंभीर थे. मध्य पूर्व का कच्चा तेल दुनिया का सबसे महंगा तेल बन गया था. ब्रेंट क्रूड के फ्यूचर 2008 के रिकॉर्ड 147.50 डॉलर को भी पार कर गए. इससे एशियाई रिफाइनरों पर लागत का बोझ काफी बढ़ गया.

एचपीसीएल ने अफ्रीका से की बड़ी खरीदारी

रॉयटर्स के मुताबिक एचपीसीएल ने एक्सॉन से क्लोव और कैबिंडा किस्म का दस लाख बैरल तेल खरीदा है. इसकी कीमत ब्रेंट क्रूड से करीब 15 डॉलर अधिक है. इसकी डिलीवरी मई के पहले दस दिनों में होगी. यह तेल राजस्थान की बाड़मेर रिफाइनरी के लिए खरीदा गया है, जिसकी क्षमता 180 हजार बैरल प्रतिदिन है.

अन्य कंपनियां भी तलाश रही विकल्प

इस सप्ताह की शुरुआत में एचपीसीएल ने व्यापारी टोट्सा से फोरकाडोस और अगबामी के एक-एक मिलियन बैरल भी खरीदे. देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्प भी पश्चिम अफ्रीका से कच्चा तेल खरीदने की कोशिश कर रही है. यह सब संकेत देता है कि भारत अब मध्य पूर्व पर निर्भरता कम कर नए बाजारों में अपनी पैठ बढ़ा रहा है.