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LAC Talks: चीन के साथ सीमा पर जल्द खत्म होगा गतिरोध? बातचीत में बड़ी सफलता के संकेत

पूर्वी लद्दाख में LAC यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन मतभेदों को कम करने के लिए 'संपर्क बढ़ाने' पर सहमत हुए हैं. सीमा गतिरोध पर द्विपक्षीय वार्ता में पहली बार 'मतभेदों को कम करना' शब्द का प्रयोग किया गया है और कूटनीतिक भाषा में ये वार्ता में प्रगति का संकेत है. लद्दाख गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था.

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India Daily Live

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मई 2020 में शुरू हुए भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध को हल करने के लिए कूटनीतिक वार्ता में कुछ डेवलपमेंट का संकेत मिला है. भारत ने गुरुवार को कहा कि दोनों पक्षों ने LAC पर स्थिति पर बीजिंग में 'मतभेदों को कम करने' और 'पेंडिंग मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने' के लिए स्पष्ट, रचनात्मक और दूरदेशी विचारों का आदान-प्रदान किया. विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संपर्क बढ़ाने पर भी सहमत हुए.

सीमा गतिरोध पर द्विपक्षीय वार्ता में पहली बार 'मतभेदों को कम करना' शब्द का प्रयोग किया गया है और कूटनीतिक भाषा में ये वार्ता में प्रगति का संकेत है. ये इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि क्रेमलिन ने दो दिन पहले कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर में रूस के कज़ान में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी तैयारी की पुष्टि की है. इससे प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को शिखर सम्मेलन से इतर मिलने का अवसर मिलेगा.

29 अगस्त को बीजिंग में हुई WMCC की 31वीं बैठक

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 31वीं बैठक 29 अगस्त 2024 को बीजिंग में आयोजित की गई. विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) गौरांगलाल दास ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा और महासागर मामलों के विभाग के महानिदेशक होंग लियांग ने किया.

इसमें कहा गया है कि जुलाई 2024 में अस्ताना और वियनतियाने में दो विदेश मंत्रियों की बैठकों की ओर से उनकी चर्चा में तेजी लाने के लिए दिए गए मार्गदर्शन के अनुरूप और पिछले महीने आयोजित WMCC बैठक के आधार पर, दोनों पक्षों ने मतभेदों को कम करने और लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ स्थिति पर विचारों का स्पष्ट, रचनात्मक आदान-प्रदान किया.

जुलाई में WMCC की बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने क्या कहा था?

इसमें कहा गया कि इसके लिए उन्होंने राजनयिक और सैन्य माध्यमों से संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई. जुलाई में WMCC की बैठक के बाद, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों पक्ष स्थापित राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से बातचीत पर सहमत हुए हैं. 

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि इस बीच, उन्होंने दोनों सरकारों के बीच प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौतों, प्रोटोकॉल और सहमति के अनुसार सीमा क्षेत्रों में ज़मीन पर शांति और सौहार्द बनाए रखने का संयुक्त रूप से निर्णय लिया. ये दोहराया गया कि शांति और सौहार्द की बहाली और एलएसी के प्रति सम्मान, द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति की बहाली के लिए आवश्यक आधार हैं.

दिल्ली में हुई थी WMCC की जुलाई वाली बैठक

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता ने चीनी विदेश मंत्रालय के उप मंत्री से भी मुलाकात की.WMCC की जुलाई माह की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई. आमतौर पर कोर कमांडर स्तर की वार्ता दो WMCC बैठकों के बीच होती है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि वर्तमान में सैन्य वार्ता के बजाय कूटनीतिक रास्ते पर काम किया जा रहा है.

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शेष टकराव बिंदुओं में मुख्य रूप से डेपसांग मैदान और डेमचोक जैसे ओल्ड प्वाइंट शामिल हैं. एलएसी पर सितंबर 2022 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग पॉइंट-15 से सैनिकों को पीछे हटा लिया था. गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी तट तथा गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र जैसे टकराव बिंदुओं पर एलएसी पर बफर जोन के निर्माण के साथ गतिरोध की शुरुआत के बाद से कुछ हद तक समाधान देखा गया है. दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात किये हैं.