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लोकसभा में 'इंडिया' गठबंधन का बड़ा यू-टर्न, स्पीकर के खिलाफ मोर्चा छोड़ खाड़ी संकट पर क्यों अड़ा विपक्ष?

बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया. विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बजाय खाड़ी देशों के संकट पर चर्चा को प्राथमिकता दी. जिससे सदन बार-बार स्थगित रहा.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत बेहद हंगामेदार रही. लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के बाद अंततः दिन भर के लिए बंद कर दी गई. विपक्ष ने शुरू में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था, लेकिन बाद में अपनी रणनीति बदल ली. विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने अब खाड़ी देशों में जारी युद्ध और उससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को मुख्य मुद्दा बना लिया है, जिससे सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार बढ़ गई है.

सुबह हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं ने अपनी योजना बदल दी. विपक्षी दलों को लगा कि लोकसभा अध्यक्ष के मुद्दे पर वोटिंग होने पर सरकार का पलड़ा भारी रहेगा, इसलिए उन्होंने खाड़ी देशों में फंसे लाखों भारतीयों और तेल की बढ़ती कीमतों को तरजीह देना बेहतर समझा. विशेषकर केरल के सांसदों का दबाव था कि वहां के करीब 25 लाख लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं, जिनका रोजगार खतरे में है.

अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट 

राहुल गांधी ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात से भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को भारी चोट पहुंचने वाली है. तेल के बढ़ते दाम आम जनता को प्रभावित करेंगे, इसलिए इन बुनियादी मुद्दों पर चर्चा जरूरी है. विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में बैनर लेकर प्रदर्शन भी किया, जिन पर मोदी सरकार को अमेरिकी दबाव में न झुकने और भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग लिखी थी.

सरकार का पलटवार 

सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इस व्यवहार को 'ड्रामा' करार दिया. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें एक विफल नेता प्रतिपक्ष बताया. वहीं अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाकर खुद चर्चा से भाग रहा है. सरकार ने अपनी ओर से विदेश मंत्री, एनएसए और सीडीएस के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं ताकि वैश्विक परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया जा सके.

केरल के प्रवासियों की चिंता 

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने तर्क दिया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं. युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है. केरल की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से वहां से आने वाले विदेशी मुद्रा पर निर्भर है. यदि वहां संकट बढ़ा तो लाखों परिवार भुखमरी के कगार पर आ सकते हैं. इसी दबाव के कारण विपक्ष ने अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव को फिलहाल पीछे छोड़कर विदेश नीति पर बहस की मांग की