अमीर बनने से पहले बीमार हो रहा भारत! CEA ने मोटापे और खराब लाइफस्टाइल को बताया सबसे बड़ा खतरा
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती बूढ़ा होना नहीं बल्कि अमीर बनने से पहले अस्वस्थ होना है. बढ़ता मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं.
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है लेकिन इसके साथ एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती भी उभर रही है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का मानना है कि देश के लिए चिंता की बात केवल जनसंख्या की उम्र बढ़ना नहीं है बल्कि लोगों का तेजी से अस्वस्थ होना है. उनका कहना है कि मोटापा शारीरिक गतिविधियों की कमी और बदलती जीवनशैली न केवल स्वास्थ्य पर असर डाल रही है बल्कि भविष्य की आर्थिक प्रगति और उत्पादकता के लिए भी खतरा बन सकती है.
मोटापा बन रहा नई चुनौती
नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत के दौरान नागेश्वरन ने कहा कि भारत की कार्यशील आबादी अभी कुछ समय तक बढ़ती रहेगी इसलिए जनसंख्या के बूढ़ा होने की चिंता फिलहाल उतनी बड़ी नहीं है. हालांकि उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि शिशु मृत्यु दर, संस्थागत प्रसव और मातृ स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सुधार हुआ है लेकिन मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है. यह समस्या केवल शहरों तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण इलाकों, विभिन्न आय वर्गों और महिलाओं-पुरुषों सभी में दिखाई दे रही है. उनके अनुसार यह स्थिति भविष्य में स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकती है.
निष्क्रिय जीवनशैली पर जताई चिंता
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियां तेजी से कम हुई हैं. उन्होंने बताया कि केवल 100 में से 6 भारतीय ही नियमित रूप से व्यायाम करते हैं जो बेहद चिंताजनक आंकड़ा है. उन्होंने शहरी ढांचे पर भी सवाल उठाए और कहा कि शहरों की योजना वाहनों को प्राथमिकता देती है जबकि पैदल चलने और साइकिल चलाने वालों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. नागेश्वरन ने लोगों को दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाने की सलाह दी जैसे सीढ़ियों का उपयोग करना, भोजन के बाद टहलना और शाम को समय पर भोजन करना.
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स्वास्थ्य से जुड़ा है आर्थिक विकास
नागेश्वरन ने स्पष्ट किया कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अब केवल सामाजिक मुद्दा नहीं बल्कि आर्थिक विकास का भी अहम आधार है. उनका कहना है कि किसी भी देश की विकास दर उसकी उत्पादकता पर निर्भर करती है और स्वस्थ श्रमिक ही बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए डिजिटल डिटॉक्स की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक यदि आने वाले वर्षों में मोटापे की दर में कमी आती है तो इसका सीधा सकारात्मक असर देश की आर्थिक वृद्धि पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल उद्योगों और तकनीक से नहीं बल्कि स्वस्थ और सक्षम मानव संसाधन से पूरा होगा.