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महंगाई की मार! अदरक ₹130 तो धनिया ₹100 प्रति किलो, जानें किस सब्जी पर कितनी बढ़ी कीमत

दिल्ली में ट्रांसपोर्टरों द्वारा तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया गया है. जिसका असर अब आम जनता के जीवन पर पड़ रहा है. सब्जियां महंगी हो गई हैं और आम यात्रियों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.

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Edited By: Shanu Sharma
महंगाई की मार! अदरक ₹130 तो धनिया ₹100 प्रति किलो, जानें किस सब्जी पर कितनी बढ़ी कीमत
Courtesy: ANI

दिल्ली में ऑटो-टैक्सी और सभी ट्रांसपोर्टरों की ओर से तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान कर दिया गया है. जिसका असर आम जनता के जीवन पर भी पड़ रहा है. हड़ताल के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को दिल्ली के थोक सब्जी बाजार में सब्जियों की कीमतें दोगुनी बढ़ गई.

मिल रही जानकारी के मुताबिक आजादपुर मंडी में शुक्रवार को धनिया की कीमत 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. वहीं अदरक की कीमत भी 100 रुपये से उछलकर 120-130 रुपये प्रति किलो हो गई. नींबू और पुदीना जैसी सब्जियों के दामों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

क्या है ट्रांसपोर्टरों की शिकायत?

दुकानदारों  का कहना है कि पूरे दिन में केवल 20 ट्रक ही मंडी पहुंचे, जो दिल्ली की रोजाना जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. वहीं प्याज और आलू पुराने स्टॉक अभी हैं, जिसके कारण इनके दाम स्थिर हैं अगर हड़ताल लंबी चली तो इनकी कीमतों में भी उछाल आ सकता हैं.

ट्रांसपोर्टरों द्वारा दिल्ली-एनसीआर में 21 मई से शुरू हुई यह हड़ताल 23 मई तक चलेगी. ट्रांसपोर्ट यूनियनों द्वारा यह हड़ताल दिल्ली सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति सेस और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के विरोध में की जा रही है. उनका कहना है कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण मध्यम वर्गीय चालक परिवार चलाने में असमर्थ हो रहे हैं.

यात्रियों पर भी पड़ रहा असर

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ा है. हड़ताल की वजह से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, आनंद विहार, मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन समेत कई व्यस्त इलाकों में लोग घंटों इंतजार करते नजर आ रहे हैं. संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर जैसे इलाकों में सैकड़ों ट्रक खड़े नजर आ रहे हैं.

इनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ गए लेकिन किराया अभी भी उतना ही है. इसके अलावा दिल्ली सरकार द्वारा लगाए गए क्षतिपूर्ति सेस पर भी ट्रांसपोर्टरों का गुस्सा बढ़ रहा है. उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताया है. हालांकि सरकार का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह कदम जरूरी है.