IMD का बड़ा अपडेट, अगस्त में देशभर में कम होगी बारिश; अल नीनो बढ़ाएगा मुश्किलें
आईएमडी ने अगस्त में देशभर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है. मौसम विभाग के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर पड़ सकता है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना बनी हुई है.
नई दिल्ली: जुलाई में मानसून की शानदार वापसी के बाद अगस्त के लिए मौसम का पूर्वानुमान कुछ चिंता बढ़ाने वाला है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि इस महीने देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. प्रशांत महासागर में सक्रिय मध्यम तीव्रता का अल नीनो मानसून पर असर डाल सकता है. हालांकि देश के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा की उम्मीद भी जताई गई है. आने वाले दो महीने कृषि, जलाशयों और जल संसाधनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक अगस्त 2026 में देशभर में औसत वर्षा दीर्घकालिक औसत के 94 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार अगस्त के लिए सामान्य वर्षा 254.9 मिमी मानी जाती है. इस बार राष्ट्रीय स्तर पर बारिश का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है.
जुलाई में हुई थी मानसून की मजबूत वापसी
जुलाई के दौरान लगातार बने कम दबाव के क्षेत्र और मानसूनी सिस्टम ने बारिश को मजबूती दी थी. इसी वजह से अल नीनो के प्रभाव के बावजूद देश में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई की यह स्थिति मानसून की मजबूती का संकेत थी, लेकिन अगस्त में परिस्थितियां बदल सकती हैं.
Also Read
कुछ राज्यों में अच्छी बारिश की उम्मीद
आईएमडी के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है. इसके अलावा प्रायद्वीपीय भारत और मध्य भारत के कुछ इलाकों में भी मानसून का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की संभावना जताई गई है.
अल नीनो और आईओडी पर टिकी नजर
मौसम विभाग ने बताया कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो अगस्त के दौरान मध्यम स्तर पर बना रहेगा और सितंबर में इसके और मजबूत होने की संभावना है. वहीं कुछ वैश्विक मॉडल सितंबर में सकारात्मक इंडियन ओशन डाइपोल बनने का संकेत दे रहे हैं, जो मानसून को कुछ राहत दे सकता है. हालांकि आईएमडी का मॉडल अभी तटस्थ स्थिति की ओर इशारा कर रहा है.
कृषि और जल संसाधनों के लिए अहम होंगे दो महीने
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त और सितंबर यह तय करेंगे कि मानसून मौसमी बारिश की कमी को कितना पूरा कर पाता है. यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है तो वर्षा में कमी आ सकती है. इसका असर खेती, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल उपलब्धता पर भी पड़ सकता है. इसलिए अगले दो महीनों पर सभी की नजर बनी रहेगी.