अब ठंड से बचने के लिए भारी जैकेट, मोटे स्वेटर या बिजली से चलने वाले हीटर पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है. IIT बॉम्बे और IISER तिरुअनंतपुरम के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसी कपड़े जैसी थर्मल बैटरी विकसित की है, जिसे पहना जा सकता है और जो सूरज की रोशनी से चार्ज होकर शरीर को गर्मी देती है.
यह थर्मल बैटरी देखने और महसूस करने में कपड़े जैसी है. दिन के समय यह सूरज की रोशनी को सोख लेती है और उसे ऊष्मा के रूप में अपने अंदर जमा कर लेती है. जब तापमान गिरता है या रात हो जाती है, तो यह जमा की गई गर्मी को धीरे-धीरे बाहर छोड़ती है, जिससे शरीर को ठंड से राहत मिलती है.
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें बिजली, तार या किसी भारी उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती. यह पारंपरिक बैटरियों की तरह रासायनिक ऊर्जा को बिजली में नहीं बदलती, बल्कि सीधे गर्मी को संग्रहित और उपयोग करती है. इसी वजह से इसे बार-बार चार्ज और डिस्चार्ज करने पर भी इसकी क्षमता पर ज्यादा असर नहीं पड़ता.
Sunlight-charged, wearable “Thermal Battery”
— IIT Bombay (@iitbombay) January 16, 2026
Warm clothing, like a sweater, protects us in cold climates by trapping the natural body-heat and thereby minimizes its loss to the cold environment outside. Turns out that there might be another smarter and sustainable way to keep… pic.twitter.com/o9pbsVoaYS
वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक खास पॉलिमर तैयार किया है. इसमें पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल (PEG) और पॉलीस्टाइरीन को-एलाइल अल्कोहल (PSAA) का उपयोग किया गया है. PEG गर्मी को जमा करने का काम करता है, जबकि PSAA इस पूरे ढांचे को मजबूती देता है. तापमान बढ़ने पर PEG का कुछ हिस्सा पिघलता है, लेकिन पूरा पदार्थ ठोस बना रहता है, जिससे इसे पहनना सुरक्षित रहता है.
इसके अलावा, इस पॉलिमर में ग्राफीन ऑक्साइड मिलाया गया है. यह सूरज की रोशनी को तेजी से ऊष्मा में बदलने में मदद करता है, जिससे थर्मल बैटरी आसानी से चार्ज हो जाती है.
इसी बीच, IIT इंदौर ने भी एक अहम उपलब्धि हासिल की है. वहां वैज्ञानिकों ने इंसानी शरीर जैसा दिखने वाला एक AI आधारित “डिजिटल ट्विन” मॉडल तैयार किया है. यह मॉडल सांस लेता है, आंखें झपकाता है और शरीर के अंदर बीमारियों के असर को दिखा सकता है. इसका मकसद डॉक्टरों को बीमारी की शुरुआती पहचान और इलाज की बेहतर प्लानिंग में मदद करना है. यह मॉडल हाल ही में भोपाल में हुई रीजनल AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 में प्रदर्शित किया गया.