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India Daily

IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अशोक चक्र से हुए सम्मानित, कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने दिया सम्मान

गणतंत्र दिवस के मौके पर कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. इस दौरान पूरे वातावरण में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजा.

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Edited By: Shanu Sharma
IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अशोक चक्र से हुए सम्मानित, कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू ने दिया सम्मान
Courtesy: X (@suzannebernert)

नई दिल्ली गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया गया है. इस भव्य समारोह में कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया. शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है. 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जब कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र देकर सम्मानित किया तो तेज तालियों की गड़गड़ाहट से वहां का वातावरण काफी उत्साहित नजर आया. वहीं स्टैंड में मौजूद शुक्ला की पत्नी कामना मिश्रा इस दौरान भावुक नजर आई. 

शुभांशु शुक्ला की खास उपलब्धि

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान उनकी खास उपलब्धि के लिए दिया गया है. शुक्ला साल 2025 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच चुके हैं. यह उपलब्धि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता और वैश्विक मंच पर उसकी मजबूत उपस्थिति का प्रतीक मानी जा रही है. शुक्ला की यह सफलता न केवल विज्ञान और तकनीक की जीत है, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी मील का पत्थर साबित हुई है. इसके साथ ही वे अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय और ISS का दौरा करने वाले पहले भारतीय बने. यह मिशन 41 वर्षों बाद हुआ, जब 1984 में कॉस्मोनॉट राकेश शर्मा ने सोयुज-11 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी. उनका यह मिशन 18 दिनों का था, इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रयोग किया. 

अंतरिक्ष यात्री के साथ कुशल फाइटर पायलट

शुभांशु शुक्ला ना केवल एक अंतरिक्ष यात्री है बल्कि एक कुशल फाइटर पायलट भी है. उनके पास 2,000 घंटे से भी ज्यादा अधिक का उड़ान अनुभव है. उन्होंने Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और An-32 जैसे कई उन्नत विमानों को उड़ाया है. इस व्यापक अनुभव ने उन्हें अंतरिक्ष मिशन के लिए मानसिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासी शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि देश के युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी है.