कोलकाता: I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है. ईडी ने आरोप लगाया है कि कोलकाता में I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों को धमकाया गया और परेशान किया गया. यह छापेमारी कथित 2742 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई थी.
ईडी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस अधिकारियों और बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं. एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान ईडी के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और अहम दस्तावेज जबरन ले जाए गए. ईडी ने इसे जांच में सीधा हस्तक्षेप बताया है.
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह याचिका पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर की गई है. याचिका तीन ईडी अधिकारियों की ओर से दाखिल की गई है, जो उस समय पश्चिम बंगाल में तैनात थे. ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस महानिदेशक ने जांच प्रक्रिया में बाधा डाली और अधिकारियों को काम करने से रोका.
याचिका में मांग की गई है कि सीबीआई इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा की भूमिका की जांच करे. ईडी का कहना है कि 8 जनवरी को हुई छापेमारी के दौरान योजनाबद्ध तरीके से हंगामा कराया गया. आरोप है कि टीएमसी समर्थकों ने हाईकोर्ट की कार्यवाही को प्रभावित करने की भी कोशिश की.
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर करीब 100 पुलिसकर्मियों के साथ प्रतीक जैन के आवास में दाखिल हुईं. इसके बाद ईडी द्वारा जब्त किए गए सबूतों को एक ट्रक में भरकर ले जाया गया. एजेंसी ने इसे कानून के शासन के खिलाफ बताया है.
इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है. राज्य सरकार ने मांग की है कि उसके पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए. वहीं I-PAC ने ईडी की कार्रवाई को परेशान करने वाला कदम बताया है. हालांकि संस्था ने यह भी कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगी और कानून का सम्मान करती रहेगी.